सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा कम होने की बात कहने वाले राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अब अदालत के एक आदेश के बाद आभार जताया है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने देश के लोगों और न्याय व्यवस्था से जुड़े पेशेवरों का भरोसा बहाल किया है. यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कुछ समय पहले ही सिब्बल ने कहा था कि बार-बार सुप्रीम कोर्ट जाने से वह थक चुके हैं और अब उन्हें अदालत से राहत मिलने की उम्मीद नहीं रह गई है.
सिब्बल की हालिया प्रतिक्रिया दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के दौरान मेट्रो सेवाओं और लोगों की आवाजाही पर लगी पाबंदियों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आई. अदालत ने अधिकारियों को राष्ट्रीय राजधानी में मेट्रो और रेलवे सेवाओं का सामान्य संचालन सुनिश्चित करने, इंटरनेट कनेक्टिविटी बाधित नहीं होने देने और लोगों की स्वतंत्र आवाजाही बनाए रखने का निर्देश दिया. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वकीलों को अपने पेशेवर कर्तव्यों के निर्वहन से नहीं रोका जाना चाहिए.
सिब्बल ने कहा, “हम भारत के सुप्रीम कोर्ट के बेहद आभारी हैं कि उसने ऐसा आदेश पारित किया, जिसने भारत के लोगों और इस देश की न्याय व्यवस्था में काम करने वाले पेशेवरों का भरोसा बहाल किया है.”
9 अक्टूबर को तत्काल सुनवाई की मांग के बाद आया बयान
इससे पहले 9 अक्टूबर को सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने की घोषणा से जुड़े मामले में कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई की मांग की थी. वह इस कदम पर रोक लगाने के लिए अदालत पहुंचे थे, लेकिन उस समय तत्काल हस्तक्षेप नहीं हो सका. इसके बाद उन्होंने न्यायपालिका के रवैये को लेकर अपनी निराशा जाहिर की थी.
सिब्बल ने कहा था कि वह बार-बार अदालत जाने से थक चुके हैं और उन्हें नहीं लगता कि सुप्रीम कोर्ट जाने से कोई फायदा होगा. उन्होंने कहा था, “हम अदालत जाते हैं, लेकिन मुझे नहीं पता कि हमें कोई राहत मिलेगी या नहीं. देश के लोग महसूस करते हैं कि इस सरकार को जाना चाहिए. ऐसे समय में अगर कोई संविधान को बचा सकता है, तो वह भारत का सुप्रीम कोर्ट है. लेकिन बार-बार सुप्रीम कोर्ट जाते-जाते मैं थक गया हूं. मैं अपनी बात कर रहा हूं. मुझे नहीं लगता कि वहां जाने का कोई फायदा है. भारत के सुप्रीम कोर्ट पर मेरा ज्यादा भरोसा नहीं रह गया है. जो होना है, वह होकर रहेगा.”

