जोहार लाइव ब्यूरो
जेपीएससी परीक्षा घोटाले की कोर्ट में चल रही सुनवाई में बुधवार 30 सितंबर को एक और अहम बात की पुष्टि हुई. सीआईडी ने कोर्ट के समक्ष बताया कि जेपीएससी सदस्या डॉ अजीता भट्टाचार्य ने अपने पीए के कहने पर कैंडिडेट के नंबर बढ़वाए और उसे पास भी कराया. जिस कैंडीडेट को पास कराने के सबूत मिले हैं, वह कैंडिडेट फिलहाल डीएसपी के पद पर तैनात है.
बुधवार को सुनवाई के दौरान आरोपी और अजीता भट्टाचार्य के पीए ब्रज कुमार राम की जमानत याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया. कोर्ट ने इसे संगठित भ्रष्टाचार का गंभीर मामला माना है.
दरअसल, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित धांधली और सेटिंग से जुड़े बहुचर्चित मामले में रांची कोर्ट ने मुख्य आरोपी और JPSC सदस्या डॉ. अजिता भट्टाचार्य के निजी सहायक ब्रज कुमार राम की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है.
अदालत के समक्ष प्रस्तुत केस डायरी और अभियोजन पक्ष यानी सीआईडी के तर्कों से यह खुलासा हुआ है कि आरोपी ने अपने पद और रसूख का इस्तेमाल कर जेपीएससी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली, नंबर बढ़ाने और उम्मीदवारों का चयन करवाने में सक्रिय भूमिका निभाई थी.
सीआईडी ने कोर्ट ने क्या कहा
सीआईडी ने कोर्ट के समक्ष बताया कि आरोपी ब्रज कुमार राम, JPSC सदस्या डॉ. अजिता भट्टाचार्य का पीए होने के नाते परीक्षा से जुड़ी गोपनीय प्रक्रियाओं और उम्मीदवारों तक सीधी पहुंच रखता था. यह पूरी तरह से पद के दुरूपयोग का मामला बनता है.
इसके अलावा उसने कहा कि जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी ने कथित तौर पर आदित्य पांडेय के कहने पर जेपीएससी सदस्या से मिलकर इंटरव्यू में एक उम्मीदवार (मनीष कुमार) के 80 नंबर बढ़वाए, जिससे उसका चयन डीएसपी के पद पर हुआ. इसके एवज में 5 लाख रुपये लेने का आरोप है.
मुख्य आरोपी अभय कुमार तिवारी और अन्य सह-आरोपियों (रामबीर सिंह, धर्मेंद्र कुमार, अरुण कुमार) के बानय के अनुसार, 11-13वी जेपीएससी परीक्षा के दौरान कई उम्मीदवारों (जैसे Dy. SP रॉबिन कुमार, शैलेश सिन्हा, मनीष कुमार, राजेश कुमार राजक और गौतम कुमार रवि) की सेटिंग के लिए प्रति उम्मीदवार 15 लाख रुपये तक का लेन-देन हुआ. इसमें चेयरमैन और अन्य सदस्यों के हिस्से की रकम को उनके करीबियों तक पहुंचाया जाता था, जबकि अजिता मैडम के हिस्से की रकम उनके पीए ब्रज कुमार राम को दी गई.
वहीं सीडीपीओ परीक्षा में भी धांधली की बात सीआईडी कोर्ट के समझ रखा है. सीआईडी ने कोर्ट को बताया, आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने सीडीपीओ (CDPO) परीक्षा में 20 लाख रुपये प्रति उम्मीदवार के हिसाब से 4 अभ्यर्थियों की सेटिंग कराई थी, जिसमें प्रमोद पाठक भी शामिल हैं.
सीआईडी ने कोर्ट को बताया कि आरोपी के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच, दिसंबर 2025 के मिजोरम/आइजोल दौरे के सुराग, बैंक खातों के विवरण और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से इस संगठित रैकेट के पुख्ता सबूत मिले हैं. सीडीआर के जरिए आरोपी की बातचीत बिंसिस के निदेशक अरुण कुमार, परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और 14वीं JPSC PT परीक्षा में सफल हुए 6 उम्मीदवारों से भी जुड़ी पाई गई है.

