भारतीय जनता पार्टी ने बिहार और उत्तर प्रदेश में होने वाले विधान परिषद चुनाव 2026 के लिए अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है. पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने दोनों राज्यों की कुल 10 सीटों के लिए प्रत्याशियों के नाम मंजूर किए हैं.
इनमें बिहार की 4 और उत्तर प्रदेश की 6 सीटें शामिल हैं. सूची में कई मौजूदा और अनुभवी विधान पार्षदों को फिर से मौका दिया गया है, जबकि कुछ ऐसे चेहरे भी हैं जो पहले निर्दलीय या दूसरे चुनावी समीकरणों के साथ मैदान में रह चुके हैं.
बिहार में चार नाम घोषित
बिहार में भाजपा ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से नवल किशोर यादव, कोसी स्नातक से डॉ. एनके यादव, दरभंगा स्नातक से सर्वेश कुमार और तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से नरेंद्र प्रसाद सिंह को उम्मीदवार बनाया है.
नवल किशोर यादव पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लंबे समय से चुनावी राजनीति में सक्रिय हैं. वह इस सीट से कई बार चुनाव जीत चुके हैं और मौजूदा विधान परिषद सदस्य भी हैं. भाजपा ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है.
डॉ. एनके यादव भी मौजूदा विधान पार्षद हैं. भाजपा ने उन्हें कोसी स्नातक सीट से दोबारा उम्मीदवार बनाया है.
वहीं सर्वेश कुमार की उम्मीदवारी इस सूची में खास है. वह फिलहाल दरभंगा स्नातक सीट से विधान पार्षद हैं. 2020 में भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी. इस बार भाजपा ने उन्हें अपने टिकट पर मैदान में उतारा है.
नरेंद्र प्रसाद सिंह भी शिक्षक राजनीति का पुराना चेहरा हैं. वह पहले तिरहुत शिक्षक सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं और 2008 में इस सीट से विधान पार्षद चुने गए थे. साल 2020 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. अब भाजपा ने एक बार फिर उन्हें मौका दिया है.
यूपी में छह सीटों पर उम्मीदवार
उत्तर प्रदेश में भाजपा ने वाराणसी स्नातक से केदार नाथ सिंह, मेरठ स्नातक से दिनेश गोयल और इलाहाबाद-झांसी स्नातक से अशोक कुमार राठौर को उम्मीदवार बनाया है.
वहीं वाराणसी शिक्षक सीट से डॉ. प्रमोद मिश्रा, आगरा शिक्षक सीट से इंजीनियर हरि किशोर तिवारी और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से ध्रुव त्रिपाठी को टिकट दिया गया है.
दिनेश गोयल मेरठ स्नातक सीट से मौजूदा भाजपा एमएलसी हैं. उन्होंने 2020 के चुनाव में जीत दर्ज की थी. भाजपा ने इस बार भी उन्हें इसी सीट से मैदान में उतारा है.
ध्रुव त्रिपाठी भी शिक्षक राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं. वह गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से मौजूदा विधान परिषद सदस्य हैं और इससे पहले भी इस सीट से लगातार चुनाव जीत चुके हैं. भाजपा ने एक बार फिर उन्हें मैदान में उतारा है.
अशोक कुमार राठौर शिक्षक राजनीति से जुड़े रहे हैं और माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा से भी उनका जुड़ाव रहा है. वह 2023 में भाजपा में शामिल हुए थे. इस बार पार्टी ने उन्हें इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट से उम्मीदवार बनाया है.
इंजीनियर हरि किशोर तिवारी भी विधान परिषद चुनाव में पहले किस्मत आजमा चुके हैं. साल 2020 में उन्होंने आगरा स्नातक सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था. अब भाजपा ने उन्हें आगरा शिक्षक सीट से प्रत्याशी बनाया है.
केदार नाथ सिंह को भाजपा ने वाराणसी स्नातक सीट से और डॉ. प्रमोद मिश्रा को वाराणसी शिक्षक सीट से उम्मीदवार बनाया है. दोनों की उम्मीदवारी के साथ भाजपा ने वाराणसी की स्नातक और शिक्षक, दोनों सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं.
पुराने और नए समीकरणों का मेल
भाजपा की सूची पर नजर डालें तो पार्टी ने कई सीटों पर अनुभवी चेहरों को दोबारा मौका दिया है. बिहार में नवल किशोर यादव और एनके यादव जैसे मौजूदा एमएलसी को फिर टिकट मिला है, जबकि सर्वेश कुमार का मामला अलग है. साल 2020 में निर्दलीय जीतने वाले सर्वेश अब भाजपा के उम्मीदवार हैं.
यूपी में भी मेरठ स्नातक के दिनेश गोयल और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक के ध्रुव त्रिपाठी जैसे मौजूदा एमएलसी को फिर मैदान में उतारा गया है. वहीं अशोक राठौर और हरि किशोर तिवारी जैसे चेहरों को अलग-अलग सीटों से मौका दिया गया है.
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