किसलय शानू
झारखंड में मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े मामलों में जमानत पर जेल से बाहर आए आरोपियों की अब पुलिस निगरानी बढ़ाने की तैयारी में है. पुलिस मुख्यालय की स्पेशल ब्रांच ने ऐसे आरोपियों के खिलाफ PIT-NDPS Act के तहत कार्रवाई की संभावनाओं को लेकर प्रस्ताव तैयार किया है. इसके तहत राज्य के अलग-अलग जेलों से जमानत पर बाहर निकले मादक पदार्थ तस्करी के मामलों के आरोपियों का सत्यापन कराया जाएगा.
स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस मुख्यालय स्तर से मिले निर्देश के बाद राज्यभर में ऐसे आरोपियों की जानकारी जुटाने और उनके वर्तमान गतिविधियों का सत्यापन करने की प्रक्रिया शुरू की गई है. रिपोर्ट सभी जिलों के एसपी के अलावा रेंज के डीआईजी और आईजी को भी भेजी गई है.
छह बिंदुओं पर होगी आरोपियों की जांच
स्पेशल ब्रांच ने जमानत पर बाहर आए आरोपियों को लेकर छह प्रमुख बिंदुओं पर कार्रवाई का प्रस्ताव दिया है.
- जेल से जमानत पर बाहर आए आरोपियों का सत्यापन कर PIT-NDPS Act के तहत कार्रवाई की संभावना देखी जाएगी.
- थाना स्तर पर आरोपियों के नाम, पते और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी का रिकॉर्ड रखा जाएगा.
- जमानत पर बाहर आए आरोपियों की गतिविधियों का सत्यापन कर CCA के तहत साप्ताहिक, पाक्षिक या मासिक थाना हाजिरी के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा.
- आरोपियों से मादक पदार्थ खरीदने वाले लोगों और पूरे तस्करी नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी.
- अगर कोई आरोपी फिलहाल मादक पदार्थ तस्करी में शामिल नहीं है, तो वह वर्तमान में क्या कर रहा है, इसकी भी जानकारी जुटाई जाएगी.
- जमानत पर बाहर आए आरोपियों के मोबाइल नंबर और उनसे जुड़ी आवश्यक जानकारी का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा.
दोबारा ड्रग कारोबार में शामिल मिले तो होगी कार्रवाई
रिपोर्ट में जिलों के एसपी को निर्देश दिया गया है कि जमानत पर बाहर आए आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी जाए. उनके वर्तमान कामकाज और गतिविधियों का सत्यापन कराया जाए. अगर कोई आरोपी दोबारा मादक पदार्थ के कारोबार या तस्करी में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए.
स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट एडीजी सीआईडी मनोज कौशिक को भी कार्रवाई के लिए भेजी गई है. इसके अलावा राज्य के 24 जिलों के एसपी, सभी रेंज डीआईजी और आईजी को भी रिपोर्ट भेजी गई है.
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क्या है PIT-NDPS Act?
PIT-NDPS Act यानी Prevention of Illicit Traffic in Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act के तहत अवैध मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए निवारक हिरासत का प्रावधान है. इसका इस्तेमाल ऐसे मामलों में किया जा सकता है जहां सक्षम प्राधिकारी कानून में निर्धारित शर्तों के तहत किसी व्यक्ति को नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी में शामिल होने से रोकने के लिए हिरासत में लेने का आदेश देता है.
यह सामान्य आपराधिक मुकदमे से अलग एक निवारक कार्रवाई है. इसके तहत हिरासत की अवधि और प्रक्रिया कानून में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार होती है.
स्पेशल ब्रांच के प्रस्ताव में सिर्फ जमानत पर बाहर आए आरोपियों की निगरानी तक सीमित नहीं रहने की बात है. उनसे मादक पदार्थ खरीदने वाले लोगों और पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने पर भी जोर दिया गया है.
इसका उद्देश्य ड्रग तस्करी से जुड़े नेटवर्क की कड़ियों की पहचान करना और दोबारा अवैध कारोबार में शामिल होने वाले लोगों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई करना है.
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