लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को नई दिल्ली के इंदिरा भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला. इस दौरान उन्होंने बीजेपी के लंबे समय तक सत्ता में बने रहने के दावे पर सवाल उठाए और चुनावी प्रक्रिया पर भी गंभीर आरोप लगाए.
राहुल गांधी ने बीजेपी के उस दावे पर पलटवार करते हुए कहा कि देश के इतिहास में ऐसा कोई प्रधानमंत्री नहीं रहा जिसके खिलाफ एंटी इनकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) न आई हो. उन्होंने कहा कि वे एक राजनीतिक परिवार से आते हैं और करीब 50 साल से राजनीति देख रहे हैं, इसलिए कोई भी राजनीतिक नेता यह दावा नहीं कर सकता कि पार्टी 30 से 50 साल तक राज करेगी.
इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, राजीव गांधी और मनमोहन सिंह की सरकारों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हर सरकार और राज्यों में समय के साथ सत्ता बदलती रही है. ऐसे में बीजेपी और नरेंद्र मोदी के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी का गायब हो जाना हैरान करने वाला है.
उन्होंने जिक्र किया कि 2014 और 2019 में बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज की, और गुजरात, मध्य प्रदेश तथा हरियाणा जैसे राज्यों में भी लगातार उनकी सरकारें बनी हुई हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि सालों से वे पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? और दावा किया कि इसका जवाब दो दिन पहले दो चुनाव आयुक्तों के बयानों से मिल गया है. राहुल गांधी ने 2024 और उससे पहले के चुनावों को फर्जी (फेक) बताते हुए गंभीर आरोप लगाए.
चुनाव आयोग और इम्युनिटी पर तीखा हमला
इस दौरान उन्होंने 2023 में बनाए गए एक कानून का जिक्र करते हुए कहा कि इसके जरिए चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा (इम्युनिटी) दे दी गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस सुरक्षा के चलते चुनाव आयुक्त स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पा रहे हैं और देश के इतिहास में लोकतंत्र पर इससे पहले इतना बड़ा हमला कभी नहीं हुआ.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में चुनाव प्रक्रिया और वोट के अधिकार को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि वोट ही देश की वह नींव है जिससे संविधान को ताकत मिलती है और कानून बनते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अगर वोट को ही खत्म कर दिया जाए, तो संविधान और संस्थाओं का कोई मतलब नहीं रह जाएगा. भारत को अब पता चल रहा है कि देश का वोट खत्म कर दिया गया है और वोट चोरी हुई है.


