सिमडेगा से भाजपा की दो बार विधायक और झारखंड सरकार में मंत्री रहीं विमला प्रधान का शुक्रवार की रात करीब नौ बजे इलाज के दौरान निधन हो गया. वह 69 वर्ष की थीं. पिछले कई महीनों से लीवर संबंधी बीमारी से परेशान विमला प्रधान का रांची के सैमफोर्ड अस्पताल में इलाज चल रहा था. उनके निधन की खबर से भाजपा समेत सिमडेगा के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है.
विमला प्रधान का जन्म 19 मार्च 1957 को हुआ था. उन्होंने सिमडेगा कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की थी. उनके पति दिलीप कुमार प्रधान हैं. उनके परिवार में पति के अलावा तीन पुत्र हैं.
2009 में पहली बार बनीं विधायक
विमला प्रधान ने भाजपा के टिकट पर 2009 में सिमडेगा विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव जीता. उन्होंने कांग्रेस के नील तिर्की को 1,113 वोटों के अंतर से हराया था. 2014 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने उन्हें सिमडेगा से उम्मीदवार बनाया और उन्होंने झारखंड पार्टी के मेनन एक्का को 3,194 वोटों से हराकर लगातार दूसरी बार विधानसभा में जगह बनाई.
दो बार विधायक रहने के दौरान वह सिमडेगा के स्थानीय मुद्दों को विधानसभा में उठाती रहीं. 2017 में उन्हें झारखंड विधानसभा के उत्कृष्ट विधायक के सम्मान से भी नवाजा गया.
अर्जुन मुंडा सरकार में संभाली मंत्री की जिम्मेदारी
विमला प्रधान अर्जुन मुंडा सरकार में मंत्री भी रहीं. उनके पास समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास और पर्यटन से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी रही. मंत्री रहते उनका काम मुख्य रूप से महिला-बाल विकास, पोषण और पर्यटन क्षेत्र की योजनाओं से जुड़ा रहा.
महिला एवं बाल विकास विभाग में उनके कार्यकाल के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को रेडी-टू-ईट भोजन उपलब्ध कराने की पहल की गई थी. उस समय राज्य के हजारों आंगनबाड़ी केंद्रों को इस व्यवस्था से जोड़ने की योजना सामने आई थी. इसका उद्देश्य बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने के साथ खाद्यान्न वितरण में होने वाली गड़बड़ियों को कम करना था.
इसी दौरान किशोरियों के पोषण, स्वास्थ्य और सशक्तीकरण से जुड़ी केंद्र प्रायोजित ‘सबला’ योजना को झारखंड के सात जिलों में शुरू किया गया. योजना के तहत किशोरियों को पोषण और स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं के साथ उन्हें विभिन्न कौशल से जोड़ने पर जोर था.
आंगनबाड़ी केंद्रों के समय में किया बदलाव
विमला प्रधान के मंत्री रहते आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन समय में भी बदलाव किया गया था. गर्मी के मौसम में केंद्रों को सुबह जल्दी खोलने और कम अवधि तक संचालित करने का निर्णय लिया गया था. विभाग का तर्क था कि इससे छोटे बच्चों को गर्मी में लंबे समय तक केंद्र में रहने से राहत मिलेगी.
इसके अलावा पोषण सप्ताह के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं के लिए गोद भराई और छह महीने की उम्र पूरी करने वाले बच्चों के लिए अन्नप्राशन कार्यक्रम आयोजित करने की पहल की गई थी. इसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पोषण पर विशेष ध्यान देना था.
पर्यटन क्षेत्र में देवघर के लिए बड़ी परियोजना
पर्यटन मंत्री रहते विमला प्रधान के कार्यकाल में देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए तिरुपति की तर्ज पर क्यू कॉम्प्लेक्स बनाने की परियोजना आगे बढ़ी. 2012 में इस परियोजना के लिए करीब 38.37 करोड़ रुपये की मंजूरी की जानकारी सामने आई थी. श्रावणी मेले के दौरान मंदिर में उमड़ने वाली भीड़ और लंबी कतारों को देखते हुए इसे महत्वपूर्ण पर्यटन एवं तीर्थयात्री सुविधा परियोजना के रूप में देखा गया था.
पर्यटन को रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी पहल हुई. गरीब और जरूरतमंद युवाओं को केटरिंग और हाउसकीपिंग जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में रोजगार से जोड़ने की योजना बनाई गई थी.
इसके अलावा राज्य के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी विभाग ने योजनाएं आगे बढ़ाईं.
2019 में नहीं मिला भाजपा का टिकट
2014 में दूसरी बार विधायक बनने के बाद 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सिमडेगा सीट से विमला प्रधान को उम्मीदवार नहीं बनाया. पार्टी ने श्रद्धानंद बेसरा को टिकट दिया. इस चुनाव में कांग्रेस के भूषण बाड़ा ने जीत दर्ज की.
विधायक और मंत्री पद से बाहर होने के बाद भी विमला प्रधान सार्वजनिक जीवन से दूर नहीं हुईं. वह संगठन और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं. उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार वह हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) की स्वतंत्र निदेशक भी रहीं.
ग्रामीण और आदिवासी मुद्दों पर भी सक्रिय रहीं
हाल के वर्षों में भी विमला प्रधान सिमडेगा और आसपास के क्षेत्रों में ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर सक्रिय थीं. 2026 में उन्होंने जलडेगा प्रखंड के टिकरा गांव पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनी थीं. बिजली और हाथियों के आतंक समेत कई स्थानीय समस्याओं को लेकर उन्होंने प्रशासन से बातचीत की थी.
उन्हें झारखंड आदिवासी गोंड महासभा की प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी सार्वजनिक कार्यक्रमों में देखा गया था.
कई महीनों से थीं बीमार
परिजनों के मुताबिक विमला प्रधान पिछले कई महीनों से लीवर संबंधी बीमारी से परेशान थीं. इलाज के लिए वह हैदराबाद भी गई थीं. इसके बाद तबीयत बिगड़ने पर उन्हें रांची के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इलाज के बाद वह घर लौट आई थीं. हाल में फिर तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सैमफोर्ड अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शुक्रवार की रात इलाज के दौरान उनका निधन हो गया.
विमला प्रधान अपने पीछे पति और तीन पुत्रों समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं. उनके निधन पर भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं और सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने शोक जताया है.
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