राज्य के प्रतिष्ठित नेतरहाट आवासीय विद्यालय में प्राचार्य पद को लेकर प्रशासनिक विवाद गहराता जा रहा है. एडहॉक कार्यकारिणी समिति के सभापति राज कुमार द्वारा 5 अगस्त को वर्तमान प्राचार्य संतोष कुमार को निलंबित कर कंप्यूटर शिक्षक रवि रंजन को प्रभारी प्राचार्य बनाए जाने के बाद विद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने 18 अगस्त को आदेश जारी कर विद्यालय में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है.
इधर, प्राचार्य पद को लेकर जारी खींचतान का असर विद्यालय के शैक्षणिक माहौल पर पड़ने की बात कही जा रही है. विद्यालय परिसर में पिटिशनर तथा उनके साथ अन्य लोगों की आवाजाही, शिक्षकों पर दबाव बनाए जाने की शिकायतों और लगातार हो रहे प्रशासनिक बदलावों से विद्यार्थियों के बीच भी असमंजस की स्थिति बनने की बात सामने आई है.
02 मई के बाद समिति की बैठक नहीं होने का दावा
वर्तमान प्राचार्य संतोष कुमार के अनुसार, एडहॉक कार्यकारिणी समिति की अंतिम बैठक 02 मई को हुई थी. उनका दावा है कि इस बैठक में न तो उनके निलंबन का निर्णय लिया गया और न ही किसी अन्य शिक्षक को प्रभारी प्राचार्य बनाए जाने का प्रस्ताव पारित हुआ था. प्राचार्य संतोष कुमार के अनुसार, इसके बाद समिति की कोई बैठक नहीं हुई. उन्होंने कहा कि 2 मई की बैठक की कार्यवाही और सदस्यों की आपत्तियों से संबंधित दस्तावेज पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं.
सभापति ने नहीं ली सदस्यों की सहमति
विवाद का एक अहम पहलू एडहॉक कार्यकारिणी समिति के सभापति राज कुमार का बयान है. उनसे जब पूछा गया कि रवि रंजन को प्रभारी प्राचार्य बनाने से पहले क्या समिति के सदस्यों की सहमति ली गई थी, तो उन्होंने स्वीकार किया कि किसी सदस्य से सहमति नहीं ली गई थी.
रवि रंजन की योग्यता के संबंध में पूछे जाने पर सभापति ने कहा कि उन्हें इसकी पूरी जानकारी नहीं है और यह निर्णय फिलहाल एक अस्थायी व्यवस्था के तौर पर लिया गया है. मार्च 2023 में तत्कालीन प्राचार्य डॉ. प्रसाद पासवान के सेवानिवृत्त होने के बाद रवि रंजन को प्रभार क्यों नहीं दिया गया था, इस सवाल पर भी उन्होंने स्पष्ट जानकारी नहीं होने की बात कही.
संतोष बोले- निलंबन आदेश भ्रामक, नियमों का उल्लंघन
संतोष कुमार ने अपने निलंबन को भ्रामक और नियम विरुद्ध बताया है. उनका कहना है कि जब समिति के सभापति स्वयं यह स्वीकार कर रहे हैं कि प्रभार परिवर्तन से पहले सदस्यों की सहमति नहीं ली गई, तो 5 अगस्त को जारी आदेश की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
संतोष कुमार ने विद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों का हवाला देते हुए कहा कि इस वर्ष नीट में विद्यालय के आठ विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की है. 12वीं के छात्र शाश्वत आनंद ने जेईई मेन में 96 परसेंटाइल प्राप्त किया है, जबकि स्टेट ओलंपियाड में चार विद्यार्थी स्टेट टॉपर रहे हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत 90 प्रतिशत से अधिक कार्य राज्य सरकार के सहयोग से पूरे कर अनुपालन प्रतिवेदन अदालत में समर्पित किया जा चुका है.
संतोष कुमार ने विद्यालय परिसर में पीआईएल से जुड़े बाहरी लोगों की आवाजाही और शिक्षकों पर दबाव बनाए जाने के प्रयासों को लेकर भी चिंता जताई.
रवि रंजन ने कहा- सभापति ने बनाया प्रभारी
वहीं, प्रभारी प्राचार्य बनाए गए रवि रंजन ने कहा कि उन्हें एडहॉक समिति के सभापति राज कुमार ने प्रभारी प्राचार्य बनाया है. उनके खिलाफ पूर्व में विद्यार्थियों के साथ मारपीट और महिला सहकर्मी को प्रताड़ित करने के आरोप लगाए जाने की बात भी सामने आई है. हालांकि, रवि रंजन ने इन आरोपों को गलत बताया है. संतोष कुमार का दावा है कि इन्हीं आरोपों के कारण वर्ष 2023 में भी रवि रंजन को प्राचार्य का प्रभार नहीं दिया गया था.
विभाग के अंतिम फैसले पर टिकी निगाहें
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कार्यकारिणी समिति के सदस्यों की सहमति नहीं ली गई थी और प्रभारी बनाए गए शिक्षक की योग्यता को लेकर भी सभापति के पास पूरी जानकारी नहीं थी, तो 5 अगस्त को प्रभार परिवर्तन का आदेश किस प्रक्रिया और अधिकार के तहत जारी किया गया. शिक्षा विभाग के 18 अगस्त के यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश के बाद फिलहाल विद्यालय की प्रशासनिक स्थिति पर अंतिम निर्णय विभाग को लेना है. ऐसे में सभी की निगाहें विभाग के अगले आदेश पर टिकी हैं.
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