आनंद दत्त/किसलय शानू
पिछले पांच किश्तों में हमने बताया कि कैसे जेपीएससी में परत-दर-परत घोटाले को अंजाम दिया गया. इसमें थोड़ा हिस्सा जेएसएससी के बारे में भी बताया था. आज हम बताएंगे कि जेएसएससी में भी कैसे अभय तिवारी और रामवीर सिंह घुसे और वहां भी भ्रष्टाचार का नंगा नाच किया. ये बात दोनों ने खुद सीआईडी के समक्ष स्वीकारा है.
बकौल अभय तिवारी, ‘’साल 2023 में मैंने जेएसआर एजेंसी नामक कंपनी में प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर के रूप में ज्वाइन किया. इस कंपनी को इंपैनल करा कर अनुबंध आधारित स्वास्थ्य विभाग में भर्तीयां कराई. इस काम में मुझे कमिशन के तौर पर 9 लाख रुपए मिले. इसके बाद दिल्ली के रहनेवाले शैंटी उर्फ लालू प्रसाद (अब मृत हैं) जो कि मेरा दोस्त था, वो टीडीपीएल का करीबी था.’’
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‘’उसने मुझसे अप्रोच किया और कहा कि टीडीपीएल को टेंडर दिलवाने में मदद करना है. चूंकि मैं झारखंड का लोकल था और यहां के कई सारे अधिकारियों के साथ मेरे अच्छे संबंध थे, इसिलिए उसने मुझसे जेएसएससी में टेंडर दिलवाने को कहा. उसने वादा किया कि जो भी बिलिंग होगा, उसमें मुझे 10 प्रतिशत कमिशन के रूप में मिलेगा.’’
वो आगे कहता है, ‘’जेएसएससी के असिस्टेंट सेक्सन ऑफिसर (एएसओ) प्रेम कुमार से मेरे अच्छे संबंध थे. इसका लाभ उठाकर मैंने टीडीपीएल कंपनी को जेएसएससी के द्वारा भर्ती प्रक्रिया को कंडंक्ट कराने के लिए निकाली गई टेंडर में इंपैनल कराने में सहयोग किया. इस एवज में टीडीपीएल कंपनी ने मुझे 5 लाख रुपए और एएसओ प्रेम कुमार को भी 5 लाख रुपए दिए. प्रेम कुमार को यह पैसा मैंने जेएसएससी भवन के मैदान में जाकर दिया था.’’
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अभय तिवारी के मुताबिक, टीडीपीएल कंपनी को जेएसएससी में सबसे पहले जेएसएससी-सीजीएल एग्जाम के बायोमेट्रिक्स का काम मिला. लेकिन रेट कम होने के कारण कंपनी ने काम करने से मना कर दिया. जिसके कारण जेएसएससी ने टीडीपीएल को डी-इंपैनल कर दिया. वो कहता है, ‘’इसके बाद मेरा संपर्क वेबल एजेंसी से हुआ.’’ वेबल एजेंसी ने भी कैसे छात्रों को बोकारो में प्रश्न-उत्तर रटाकर घपला किया था, वो हम आपको पहले ही बता चुके हैं.
रामवीर सिंह ने भी किया स्वीकार
सीआईडी के समक्ष स्वीकारोक्ति में रामवीर सिंह बताता है, ‘’साल 2013 में जेएसएससी में इंपैनलमेंट का टेंडर निकला था. इसे दिलाने में अभय तिवारी ने मेरी मदद की थी. चूंकि जेएसएससी-सीजीएल प्रतियोगिता परीक्षा के एनक्लिलरी सर्विसेज के काम को करने में काफी घाटा हुआ था, साथ ही मुझे परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी भी नहीं दी गई. ऐसे में मैंने आगे काम करने से मना कर दिया. इसी वजह से जेएसससी ने मुझे डी-इंपैनल कर दिया.’’
बता दें, परीक्षाओं के संदर्भ में एनक्लिलरी सर्विसेज का मतलब होता है परीक्षा केंद्र पर उम्मीदवारों की पहचान की जांच (बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन), सुरक्षा चेकिंग और सीसीटीवी निगरानी. प्रश्नपत्रों को सुरक्षित रूप से केंद्र तक पहुंचाना और उत्तर पुस्तिकाओं को वापस कलेक्ट करना. ऑनलाइन या कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं (CBT) के दौरान सर्वर, कंप्यूटर और इंटरनेट की देखरेख करने वाली तकनीकी टीम मुहैया कराना. संक्षेप में कहें तो, यदि आपने किसी परीक्षा के फॉर्म या नियमों में यह शब्द देखा है, तो इसका मतलब परीक्षा को निष्पक्ष और सुगम बनाने के लिए दी जाने वाली अतिरिक्त मदद या प्रशासनिक व्यवस्था से है.
जेपीएससी-14, जेपीएससी-11-13 और जेएसएससी सीजीएल में कथित अनियमितताओं की जांच जारी है. सीआईडी लगातार जांच और छापेमारी कर रही है. इन सब के बीच छात्रों का आंदोलन भी हर दिन मजबूत होता जा रहा है. छात्र इस बात पर अड़े हैं कि सीजीएल की परीक्षाओं को रद्द करना होगा साथ ही पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपनी होगी. फिलहाल छात्रों और सरकार के बीच सीधा संवाद भी बंद हैं. छात्रों ने साफ कहा है कि वो न तो सीएम का इस्तीफा मांग रहे हैं न ही सीएम आवास का घेराव करने जा रहे हैं. इन सब के बीच देशभर में यही जिज्ञासा है कि छात्रों का यह आंदोलन कब तक चलेगा और इसका अंतिम परिणाम क्या होगा.
जेपीएससी-जेएसएससी के खुलासों से संबंधित छह किश्तों की यह सीरीज का आखिरी अध्याय था. अब आगे हम आपको एक-एक आरोपी के पूरे कबूलनामें को बताएंगे.
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