आनंद दत्त/ किसलय शानू
पहली खबर में हमने बताया कि कैसे झारखंड पब्लिक सर्विस कमिशन (JPSC) के तत्कालीन चेयरमैन ने 2 करोड़ रुपए और 20 प्रतिशत अतिरिक्त कमीशन तय करने के बाद टीडीपीएल कंपनी को काम सौंपा और फिर उसे सीट बेचने का रास्ता खोल दिया. दूसरी खबर में बताया कि कैसे झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमेटी (जेएसएससी) ने कंबाइंड ग्रैजुएट लेवल (सीजीएल) का पेपर लीक हुआ था. कहां से प्रश्न आए, कहां छात्रों को रखा गया, उन्हें प्रश्न और उसके उत्तर रटवाए गए और उसके बदले कितने पैसे लिए गए.
आज हम बताने जा रहे हैं कैसे जेपीएससी के अध्यक्ष एल ख्यांगते के अलावा जेपीएससी के अन्य तीनों सदस्य अजीता भट्टाचार्य, जमाल अहमद, अनीमा हांसदा और पतंजली कोचिंग के रवि कुमार मिलकर कैंडीडेट पास कराते थे. चारों लोगों ने 11-13वीं जेपीएससी में अभय तिवारी, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह व अन्य लोगों के साथ मिलकर कैंडीडेट से पैसे लेकर आपस में बंदरबांट करते थे. जिस कैंडीडेट से जो अधिकारी पैसा लेता था, उसे अपने साक्षात्कार बोर्ड में लेकर अधिक नंबर देकर पास करा देते थे.
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अभय तिवारी के स्वीकारोक्ति बयान के मुताबिक, ‘’11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में जमाल अहमद, अजीता भट्टाचार्य और अनीमा हांसदा मैडम के साथ-साथ जेपीएससी चेयरमैन से संपर्क कर इंटरव्यू में सेटिंग कराई गई है. जिसमें मेरे द्वारा आदित्य पांडेय नामक व्यक्ति से संपर्क कर अभ्यर्थी उपलब्ध कराया गया. आदित्य पांडेय ने अजीता भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, जमाल अहमद, अनीमा हांसदा और एल ख्यांगते से संपर्क कर चुने गए अभ्यर्थियों के नंबर बढ़ाए. इंटरव्यू में कुल सात प्रतिभागियों को लाभ पहुंचाया गया. जिसके एवज में प्रति कैंडीडेट 15 लाख रुपए वसूले गए.’’

उसने बताया, ‘’इस सेटिंग से पास हुए अभ्यर्थियों में पुलिस उपाधीक्षक रोबिन कुमार, पुलिस उपाधीक्षक रोबिन सिन्हा, डिप्टी जेलर राजेश कुमार रजक शामिल हैं. इन तीनों के एजेंट कोडरमा निवासी लालू यादव हैं. लालू यादव ने इन तीनों को मुझे सौंपा और फिर मैंने रामवीर सिंह को देकर एल ख्यांगते और अजीता भट्टाचार्य को बोर्ड से सेटिंग कराया. चौथे कैंडीडेट पुलिस उपाधीक्षक मनीष कुमार का संपर्क भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम के माध्यम से, पांचवे कैंडीडेट गौतम कुमार की सेटिंग पतंजली कोचिंग के संचालक रवि कुमार के माध्यम से कराई गई. अन्य दूसरे एजेंटों द्वारा भी चेयरमैन व अन्य मेंबर से सेटिंग की जानकारी मुझे मिली थी.’’

अभय तिवारी आगे बताता है, ‘’जेपीएससी 11वीं से 13वीं के सिविल सेवा के प्रारंभिक परीक्षा का रेट सामान्य वर्ग के लिए 5 लाख, अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए 2-3 लाख रुपया था. वहीं अंतिम परिणाम जारी होने तक का रेट प्रति कैंडीडेट 60 से 70 लाख रुपए था. इंटरव्यू के पैसे अजीता भट्टाचार्य के पीए और मोरहाबादी निवासी ब्रजराम को दिए जाते थे. चेयरमैन एल ख्यांगते धर्मेंद्र के माध्यम से पैसा लेते थे. वहीं जमाल अहमद हजारीबाग के कई दलालों के माध्यम से कैंडीडेट की सेटिंग करते थे, जिसकी पूरी जानकारी रामवीर सिंह को होती थी.’’
वो कहता है, ‘’ये सभी निदेशक टीडीपीएल के प्रमुख रामवीर सिंह से इंटरव्यू में कैंडीडेट के कोड को डी-कोड करने का दवाब बनाते थे. यह जानकारी समय-समय पर रामवीर मुझे देता रहता था. ज्यादातर कैंडीडेट किसी ने किसी मेंबर से पैसे की सेटिंग कर इंटरव्यू में भाग लेते थे. चेयरमैन एल ख्यांगते इंटरव्यू से एक दिन पहले ही रामवीर सिंह से कह कर कोड को डी-कोड करवा लेते थे. इंटरव्यू के दिन उस कैंडीडेट को अपने या भट्टाचार्य मैडम के बोर्ड में इंटरव्यू आवंटित करते थे.’’
सीडीपीओ की परीक्षा में भी की थी वसूली
अभय तिवारी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. एक और खुलासे में उसने बताया है कि, सीडीपीओ की परीक्षा में भी टीडीपीएल की ओर से अभ्यर्थी उपलब्ध कराया गया, जिसका प्रति अभ्यर्थी 10 लाख रुपए रेट था. इस परीक्षा में सभी जेनरल सीट पर झारखंड के बाहर राज्यों के लोग चयनित हुए हैं. इनके द्वारा सेटिंग कराए गए सफल अभ्यर्थी रजक (पूरा नाम का जिक्र नहीं है) का इंटरव्यू बोर्ड चेयरमैन एल ख्यांगते के पास था, जिसमें रामवीर सिंह से बात होने के बाद चेयरमैन को 15 लाख रुपए दिए गए. काजल भारती का इंटरव्यू बोर्ड भट्टाचार्य के पास था, इसके लिए उनके पीए ब्रजराम को 10 लाख रुपए दिए गए. ब्रजराम का पतंजली कोचिंग के संचालक रवि कुमार के साथ काफी उठना बैठना था.
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प्रमोद कुमार पाठक की सेटिंग कृष्णा ने कराया था, जो आईटीआई का प्रोजेक्ट मैनेजर था. उनसे कुमारी सोनी जायसवाल (इंटरव्यू बोर्ड भट्टाचार्य), विभूती कुमार, स्वाती कुमारी, अंकित कुमार की भी सेटिंग कराई थी. अन्य लोगों की सेटिंग रामवीर सिंह ने कराई थी.
वहीं रामवीर सिंह के कबूलनामे के मुताबिक 11-13वीं जेपीएससी कंबाइंड सिविल सर्विसेज और सीडीपीओ के इंटरव्यू के लिए प्रत्येक अभ्यर्थी का रोल नंबर के आधार पर एक कोड टीडीपीएल के द्वारा जेनरेट किया जाता था. उन्हीं कोड्स के अनुसार रैंडम तरीके से इंटरव्यू बोर्ड आवंटित किया जाता था. लेकिन जिन अभ्यर्थियों की सेटिंग चेयरमैन व अन्य सदस्यों के साथ रहती थी, उनके रोल नंबर और संबंधिक कोड की सूची हम चेयरमैन एल ख्यांगते को उपलब्ध करा देते थे. चेयरमैन उस सूची के आधार पर समझ जाते थे कि उनके चयनित अभ्यर्थी का इंटरव्यू किस बोर्ड में है. फिर उसी आधार पर बोर्ड आवंटित किया जाता था.

इधर जोहार लाइव में खबर छपने के बाद बीते 10 अगस्त को झारखंड सरकार हरकत में आई. सीएम हेमंत सोरेन के निर्देश पर सीआईडी ने जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन एल ख्यंगते को देर शाम गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. उसी दिन बोर्ड की सदस्य रहीं अजीता भट्टाचार्य से भी सीआईडी ने दिनभर पूछताछ की. आनेवाले दिनों में अन्य सदस्यों से भी पूछताछ की जानी है.
क्रमश…



