बीते 9 अगस्त को जोहार लाइव ने एक बड़ा खुलासा किया था. जिसमें हमने बताया था कि जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन एल ख्यांगते ने किस तरीके से टीडीपीएल नामक कंपनी को जेपीएससी परीक्षा कंडक्ट कराने का काम दिया था और उसके बदले 2 करोड़ रुपए और टोटल बिलिंग में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी तय कराई थी.
जोहार लाइव की खबर का असर हुआ. सरकार जागी और 10 अगस्त को जब छात्र विधानसभा का घेराव कर रहे थे, लाठीचार्ज हो रहा था, वाटर कैनन छोड़े जा रहे थे, ठीक उसी वक्त सीएम हेमंत सोरेन ने एल ख्यांगते को गिरफ्तार करने का आदेश दिया. सीआईडी ने उन्हें उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया.
एक बार फिर पढ़िये एल ख्यांगते ने कैसे-कैसे भ्रष्टाचार को ही अपना मुख्य काम बना लिया
अभय तिवारी की ओर से सीआईडी के सामने किए गए कबूलनामा (संबंधित साक्ष्य जोहार लाइव के पास उपलब्ध है) के मुताबिक टीडीपीएल को काम दिलाने के एवज में तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्य सचिव से दो करोड़ रुपए में सौदा तय हुआ था. इसके साथ कंपनी को विभिन्न कार्यों के लिए जितना भुगतान किया जाएगा, उस भुगतान में भी 20 प्रतिशत कमिशन अध्यक्ष को देना तय किया गया. इस लेनदेन में मुख्य कड़ी बना मुख्य सचिव के आवास में कार्यरत कर्मी धर्मेंद्र.
बकौल अभय तिवारी, धर्मेंद्र से जब संपर्क हुआ तो उसने कहा कि वह टीडीपीएल कंपनी को जेपीएससी में ओटीआर, ओएमआर स्कैनिंग, ओएसएम, एडमिट कार्ड जेनरेटिंग, एटेंडेंस शीट प्रिंटिंग का काम दिला देगा. इसके लिए उसने 20-25 लाख रुपया बतौर कमीशन मांग किया. साथ ही उसने यह भी कहा कि टीडीपीएल को काम दिलाने के अलावा वह उसके कुछ अभ्यर्थियों को भी पास करा देगा. इसकी जानकारी जब मैंने टीडीपीएल के निदेशकों में से एक रामवीर सिंह को दी, तो वह तत्काल इसके लिए तैयार हो गया. इसके बाद रामवीर सिंह ने धर्मेंद्र के मांगने पर अपनी कंपनी से संबंधित कागजात उसे सौंप दिए. तब धर्मेंद्र ने वादा किया कि वह जेपीएससी में टीडीपीएल का प्रजेंटेशन करा देगा.
इधर प्रजेंटेशन से पहले अभय तिवारी, आनंद उर्फ सानंद प्रकाश, टीडीपीएल के दोनों निदेशक रामवीर सिंह और सत्यपाल सिंह की मुलाकात जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यांगते के साथ होटल रैडिशन ब्लू के वाटरफ्रंट के सामने स्थित रेस्टूरेंट में हुई. जहां इन सभी की बातचीत हुई. जहां ख्यांगते ने कहा कि देखते हैं टीडीपीएल की क्या क्षमता है.
मोरहाबादी मैदान में मुलाकात और 2 करोड़ की डील
इस मुलाकात के दो दिन बाद अध्यक्ष और अन्य सदस्यों के सामने प्रजेंटेशन हुआ. प्रजेंटेशन खत्म होते ही एल ख्यांगते ने रामवीर सिंह को धर्मेंद्र से मिलने को कहा और कंपनी की फाइल परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को दे दिया. फिर धर्मेंद्र ने कहा कि अब आगे की बातचीत वही करेगा. अब आगे की बातचीत के लिए अभय तिवारी, रामवीर सिंह और धर्मेंद्र की मुलाकात मोरहाबादी मैदान में हुई. वही मैदान, जहां से जेएलएकम के नेता देवेंद्र महतो ने जेपीएससी-14 में हुई कथित धांधली के खिलाफ धरने की शुरूआत की थी.

बहरहाल, मुलाकात के बाद धर्मेंद्र ने तय किया कि चेयरमैन साबह यानी एल ख्यांगते को 2 करोड़ रुपए और काम दिलवाने के एवज में खुद उसे 20-25 लाख रुपया बतौर कमीशन देना है. साथ ही कुछ छात्रों को पास कराने के लिए शर्तें रखीं. जिसके मुताबिक ऊपर तय की गई रकम के अलावा टीडीपीएल कंपनी की जो भी बिलिंग होगी, यानी जितने पैसे वो जेपीएससी से लेगा, उसका 20 प्रतिशत हिस्सा अलग से एल. ख्यांगते को देना होगा. कंपनी के दोनों निदेशकों को धर्मेद्र की इन शर्तों को मानने में कोई परेशानी नहीं हुई. होती भी कैसे, प्लान तो पहले से तय था. एक-एक सीट के बदले छात्रों से 30 से 40 लाख रुपए जो मिलने थे.
मोरहाबादी मैदान में हुई इस मुलाकात के बाद इन सभी की मीटिंग महज कुछ सौ मीटर दूर स्टेट गेस्ट हाउस के एक कमरे में हुई. इस बातचीत के दौरान एल ख्यांगते ने कंपनी के दोनों निदेशकों को स्पष्ट तौर पर कहा कि वो लगातार धर्मेंद्र के संपर्क में रहें.
इसी मुलाकात के बाद जून 2025 में टीडीपीएल कंपनी को जेपीएससी से सभी परीक्षाओँ को कंडक्ट कराने का एग्रीमेंट हासिल हो गया और तत्काल प्रभाव से वर्क ऑर्डर भी मिल गया.




