तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने जांच एजेंसियों को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक उनके खिलाफ कोई सख्त या दंडात्मक कार्रवाई न की जाए. साथ ही पुलिस को उनके खिलाफ दर्ज सभी FIR की सूची अदालत में पेश करने का आदेश दिया गया है. जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की बेंच ने मामले की सुनवाई की. अब अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी.
अभिषेक बनर्जी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने खिलाफ दर्ज कई FIR को रद्द करने की मांग की है. उनका कहना है कि चुनाव के बाद राजनीतिक कारणों से उनके खिलाफ लगातार मामले दर्ज किए गए. फिलहाल कोर्ट ने FIR रद्द नहीं की हैं, लेकिन अगली सुनवाई तक उन्हें अंतरिम राहत दे दी है.
केंद्र और राज्य सरकार ने याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए. एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि एक ही याचिका में कई FIR को चुनौती नहीं दी जा सकती और हर FIR के लिए अलग याचिका दाखिल करनी चाहिए.
अभिषेक बनर्जी की दलील
बनर्जी की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि 2021 विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ दर्ज कई FIR पर भी हाई कोर्ट ने एक साथ सुनवाई की थी. उन्होंने दावा किया कि चुनाव नतीजों के बाद उनके मुवक्किल के खिलाफ अब तक 11 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं और कई मामलों में FIR काफी देरी से दर्ज की गई, जिससे राजनीतिक मंशा साफ नजर आती है.
उन्होंने यह भी कहा कि “बंगला विरोधी गुजराती गैंग” जैसी राजनीतिक टिप्पणी को आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता.
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि जांच जारी रहेगी, लेकिन फिलहाल अभिषेक बनर्जी को हिरासत में लेने जैसी कार्रवाई की जरूरत नहीं दिखती. बेंच ने यह भी टिप्पणी की कि किसी आम व्यक्ति के खिलाफ इतनी बड़ी संख्या में FIR दर्ज होना सामान्य बात नहीं है.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कोई भी व्यक्ति पहले से यह आदेश नहीं मांग सकता कि भविष्य में उसके खिलाफ FIR दर्ज न हो या पुलिस कार्रवाई न करे. उन्होंने कहा कि सिर्फ राजनीतिक विरोधियों द्वारा शिकायत दर्ज कराने से जांच पर रोक नहीं लगाई जा सकती.
हाई कोर्ट ने अभी किसी भी FIR को रद्द नहीं किया है. फिलहाल अदालत ने सिर्फ अंतरिम राहत दी है और पुलिस को अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज सभी FIR की सूची पेश करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी, जहां कोर्ट याचिका की स्वीकार्यता और आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगा.
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