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    Home»क्राइम»झारखंड: डीजीपी ने कहा, सारंडा से भागकर मिसिर बेसरा पारसनाथ इलाके में संगठन को फिर से पुनर्जीवित करने का कर रहा था प्रयास
    क्राइम

    झारखंड: डीजीपी ने कहा, सारंडा से भागकर मिसिर बेसरा पारसनाथ इलाके में संगठन को फिर से पुनर्जीवित करने का कर रहा था प्रयास

    Joharlive NetworkBy Joharlive NetworkJuly 29, 2026Updated:July 29, 2026No Comments4 Mins Read4
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    भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी की खबर सामने आने के एक दिन बाद झारखंड पुलिस मुख्यालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इसे माओवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता बताया है. पुलिस का दावा है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के साथ ही झारखंड में माओवादी संगठन का शीर्ष नेतृत्व लगभग खत्म हो गया है. सवाल यह है कि आखिर इस गिरफ्तारी को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है?

    पुलिस मुख्यालय के मुताबिक मिसिर बेसरा भाकपा (माओवादी) का एकमात्र सक्रिय पोलित ब्यूरो सदस्य था. पोलित ब्यूरो संगठन की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली इकाई होती है, जहां रणनीति, विस्तार, हथियारों की व्यवस्था और बड़े अभियानों की योजना बनाई जाती है. पुलिस का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी से संगठन की कमान को बड़ा झटका लगा है.

    25 साल से सक्रिय, सिर्फ गिरफ्तारी नहीं दो महीने की पूरी रणनीति

    प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार मिसिर बेसरा के खिलाफ 175 आपराधिक मामले दर्ज हैं. पुलिस ने जिन प्रमुख मामलों का उल्लेख किया है, उनमें 2001 के चुरचू और तोपचांची हमले, 2005 का जहानाबाद जेल ब्रेक, 2022 में गोइलकेरा में पूर्व विधायक गुरुचरण नायक के अंगरक्षकों की हत्या, 2023 और 2025 में पश्चिम सिंहभूम में सुरक्षा बलों पर आईईडी हमले और 2026 की मुठभेड़ जैसी घटनाएं शामिल हैं. इससे स्पष्ट होता है कि वह दो दशक से अधिक समय तक संगठन के प्रमुख ऑपरेशनल कमांडरों में शामिल रहा.

    पुलिस मुख्यालय के अनुसार यह कार्रवाई अकेली नहीं है. पिछले दो महीनों में 27 और फिर 16 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया. इसी दौरान 20 लाख के इनामी रविंद्र गंझू और 25 लाख के इनामी अजय महतो उर्फ टाइगर को भी गिरफ्तार किया गया. पुलिस का दावा है कि लगातार गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण से माओवादी संगठन का ढांचा तेजी से कमजोर हुआ है.

    हथियारों की बरामदगी भी अहम

    पुलिस के मुताबिक मिसिर बेसरा और उसके साथियों के पास से तीन AK-47 रायफल, आठ मैगजीन और 288 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं. सुरक्षा एजेंसियां इसे संगठन की सैन्य क्षमता को कमजोर करने वाली कार्रवाई मान रही हैं.

    दोबारा खड़ा करने का था प्रयास

    झारखंड पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी सिर्फ एक शीर्ष माओवादी की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि संगठन के पुनर्गठन की कोशिशों पर भी बड़ा प्रहार है. डीजीपी के अनुसार, सारंडा में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के बाद मिसिर बेसरा वहां से निकलकर पारसनाथ क्षेत्र पहुंच गया था. यहां वह माओवादी संगठन को दोबारा खड़ा करने और अपनी गतिविधियों को विस्तार देने का प्रयास कर रहा था. हालांकि, संयुक्त सुरक्षा बलों ने उसे उसके मंसूबों में सफल होने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया.

    डीजीपी ने कहा कि पुलिस का लक्ष्य केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा. मिसिर बेसरा और उसके साथ गिरफ्तार अन्य माओवादियों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा कर उन्हें स्पीडी ट्रायल के माध्यम से जल्द से जल्द सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा. इसके लिए सभी लंबित मामलों का परीक्षण कर साक्ष्यों को मजबूत करने और अभियोजन की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं.

    पुलिस मुख्यालय ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया है कि पिछले दो महीनों में लगातार हुई गिरफ्तारियों और आत्मसमर्पण की घटनाओं से माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है. पुलिस का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व के कमजोर पड़ने के बाद अब शेष सक्रिय माओवादियों को भी मुख्यधारा में लाने और हिंसा मुक्त झारखंड के लक्ष्य की दिशा में अभियान जारी रहेगा.

    अब पुलिस का अगला लक्ष्य क्या?

    प्रेस विज्ञप्ति में झारखंड पुलिस ने दावा किया है कि राज्य में भाकपा (माओवादी) का नेटवर्क लगभग समाप्ति की स्थिति में पहुंच गया है. हालांकि सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब भी चुनौती यह रहेगी कि बचे हुए सशस्त्र दस्तों, आईईडी नेटवर्क और सीमावर्ती राज्यों में सक्रिय माओवादी कैडरों पर भी इसी तरह कार्रवाई जारी रखी जाए. इसी वजह से पुलिस ने शेष माओवादियों से आत्मसमर्पण कर झारखंड सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाने की अपील की है.

    Also Read : मर जाऊंगा, लेकिन सरेंडर नहीं करूंगा: कहने वाले मिसिर बेसरा के कारनामों की पूरी लिस्ट

    भाकपा माओवादी मिसिर बेसरा
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