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    Home»कोर्ट की खबरें»अंकुश शर्मा हत्याकांड में CCTV फुटेज नहीं दिखा सकी पुलिस, दो आरोपियों को कोर्ट ने किया बरी
    कोर्ट की खबरें

    अंकुश शर्मा हत्याकांड में CCTV फुटेज नहीं दिखा सकी पुलिस, दो आरोपियों को कोर्ट ने किया बरी

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharyJune 9, 2026Updated:June 9, 2026No Comments3 Mins Read
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    रांची सिविल कोर्ट
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    Ranchi : रांची के चर्चित अंकुश शर्मा हत्याकांड में अदालत ने दो आरोपियों को बरी कर दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी (आईओ) अदालत में वह CCTV फुटेज पेश नहीं कर सके, जिसे पुलिस ने अपने केस का अहम आधार बताया था। कोर्ट ने माना कि पर्याप्त और ठोस साक्ष्य नहीं होने के कारण आरोप साबित नहीं किए जा सके, इसलिए दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच अधिकारी से उस CCTV फुटेज को पेश करने को कहा, जिसके आधार पर आरोपियों की संलिप्तता का दावा किया गया था। लेकिन पुलिस फुटेज कोर्ट में प्रस्तुत नहीं कर सकी। ऐसे में अदालत ने माना कि जब जांच एजेंसी अपने सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य को ही पेश नहीं कर पाती है, तो अभियोजन पक्ष की कहानी कमजोर हो जाती है।

    हत्या के मामले में आरोपियों पर था शक

    अंकुश शर्मा हत्याकांड में पुलिस ने जांच के बाद कई लोगों को आरोपी बनाया था। जांच एजेंसी का दावा था कि आरोपियों की गतिविधियां CCTV कैमरों में कैद हुई थीं और उसी आधार पर उनकी भूमिका सामने आई थी। लेकिन अदालत में जब इस दावे को साबित करने की बारी आई तो संबंधित फुटेज पेश नहीं किया जा सका। इससे पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए। भारतीय न्याय व्यवस्था में किसी भी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए आरोपों का संदेह से परे साबित होना जरूरी होता है। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया गया।

    केस के अन्य पहलुओं पर सुनवाई जारी

    हालांकि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि पूरा मामला खत्म हो गया है। हत्याकांड से जुड़े अन्य आरोपियों और पहलुओं को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। फिलहाल अदालत के इस फैसले ने जांच की गुणवत्ता और साक्ष्य जुटाने के तरीके पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस फैसले के बाद एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई है कि गंभीर आपराधिक मामलों में जांच एजेंसियों को तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और अदालत में पेश करने के प्रति अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि कई बार ऐसे अहम सबूतों की अनुपस्थिति पूरे मामले की दिशा बदल देती है।

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