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    Home»झारखंड»कैंसर जांच के लिए दिल्ली-कोलकाता दौड़ खत्म, रिम्स में जल्द मिलेगी PET स्कैन सुविधा
    झारखंड

    कैंसर जांच के लिए दिल्ली-कोलकाता दौड़ खत्म, रिम्स में जल्द मिलेगी PET स्कैन सुविधा

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkMay 28, 2026Updated:May 28, 2026No Comments4 Mins Read3
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    रिम्स
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    Ranchi : राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में कैंसर मरीजों के लिए जल्द ही PET स्कैन मशीन लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। करीब छह महीने से चल रही टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब इस दिशा में तेजी से काम शुरू किया जा रहा है। यह सुविधा पीपीपी यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर संचालित होगी। रिम्स प्रबंधन का कहना है कि मशीन शुरू होने के बाद झारखंड के हजारों कैंसर मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। अभी तक मरीजों को इस जांच के लिए दूसरे राज्यों या महंगे निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता था।रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार के मुताबिक, आयुष्मान कार्डधारी और बीपीएल श्रेणी के मरीजों को PET स्कैन की सुविधा मुफ्त में दी जाएगी। निजी अस्पतालों में यह जांच 25 हजार से 45 हजार रुपये तक में होती है, लेकिन रिम्स में गरीब मरीजों को यह सुविधा निशुल्क देने की तैयारी है। वहीं सामान्य मरीजों के लिए भी यह जांच काफी सस्ती दर पर उपलब्ध कराने की योजना है। बताया जा रहा है कि करीब पांच हजार रुपये में जांच कराने की सुविधा मिल सकती है।

    अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा

    अभी झारखंड के किसी भी सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में PET स्कैन की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कैंसर मरीजों को कोलकाता, दिल्ली, भुवनेश्वर या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। इससे मरीजों का समय और पैसा दोनों खर्च होता है। कई बार आर्थिक तंगी की वजह से मरीज जरूरी जांच भी नहीं करा पाते। ऐसे में रिम्स में यह सुविधा शुरू होना राज्य के स्वास्थ्य ढांचे के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।

    कैंसर की पहचान में बेहद अहम है PET स्कैन

    PET स्कैन कैंसर की पहचान, उसके फैलाव और इलाज के असर को जानने की बेहद आधुनिक जांच मानी जाती है। इससे शरीर में कैंसर कोशिकाओं की गतिविधियों का पता चलता है। डॉक्टरों के अनुसार कैंसर की शुरुआती पहचान में यह जांच काफी मददगार साबित होती है। समय पर बीमारी पकड़ में आने से इलाज जल्दी शुरू हो पाता है और मरीज के ठीक होने की संभावना भी बढ़ जाती है। PET स्कैन का इस्तेमाल सिर्फ कैंसर ही नहीं, बल्कि दिल और दिमाग से जुड़ी कुछ गंभीर बीमारियों की जांच में भी किया जाता है।

    रिम्स में पहले से चल रही हैं कई जांच सेवाएं

    रिम्स में पहले से ही PPP मोड पर हेल्थ मैप के जरिए MRI, CT स्कैन और एक्स-रे जैसी रेडियोलॉजिकल जांच सेवाएं संचालित हो रही हैं। इन जांचों को अपेक्षाकृत कम कीमत पर किया जाता है। हालांकि इन सेवाओं से जुड़ी एक बड़ी समस्या भी सामने आई है। गरीब मरीजों को मिलने वाली मुफ्त जांच सुविधा फिलहाल प्रभावित है। संचालकों का कहना है कि रिम्स प्रबंधन की ओर करोड़ों रुपये का भुगतान बकाया है, जिसकी वजह से आयुष्मान और बीपीएल मरीजों को मिलने वाली निशुल्क सेवाएं प्रभावित हुई हैं।

    सदर अस्पताल में भी सामने आई ऐसी समस्या

    सिर्फ रिम्स ही नहीं, बल्कि रांची सदर अस्पताल में भी PPP मोड पर MRI और CT स्कैन की सुविधा दी जा रही है। वहां भी भुगतान में देरी की वजह से कई बार गरीब मरीजों की मुफ्त जांच व्यवस्था प्रभावित होती रही है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि रिम्स में शुरू होने वाली PET स्कैन सेवा को सुचारु रूप से चलाने के लिए समय पर भुगतान और मजबूत संचालन व्यवस्था बेहद जरूरी होगी।

    विशेषज्ञों ने दी व्यवस्था सुधारने की सलाह

    आईएमए सचिव डॉ. प्रदीप सिंह का कहना है कि सरकार को सिर्फ मशीन लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जरूरी है कि उसकी संचालन व्यवस्था भी मजबूत हो, ताकि गरीब मरीजों को लगातार लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि भुगतान प्रणाली पारदर्शी और समयबद्ध होगी तभी यह सुविधा लंबे समय तक सही तरीके से चल पाएगी।

    झारखंड में तेजी से बढ़ रहे कैंसर मरीज

    आंकोलॉजिस्ट डॉ. रोहित झा के मुताबिक, झारखंड में हर साल करीब 35 से 40 हजार नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं। तंबाकू सेवन, प्रदूषण, खराब जीवनशैली और देर से जांच इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है। राज्य में मुंह, फेफड़ा, स्तन और गर्भाशय कैंसर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर स्क्रीनिंग और शुरुआती जांच से कैंसर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

    रिम्स और सदर अस्पताल में इलाज की सुविधा

    रिम्स में कैंसर मरीजों के लिए मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और रेडियोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध है। यहां हर महीने करीब 2500 से 3000 मरीज इलाज और परामर्श के लिए पहुंचते हैं। वहीं रांची सदर अस्पताल में स्तन कैंसर, मुंह के कैंसर और सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती जांच और स्क्रीनिंग की सुविधा दी जा रही है। यहां हर महीने करीब 400 से 600 मरीज कैंसर संबंधी जांच के लिए पहुंचते हैं।

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