Ranchi: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने राज्य के चर्चित शराब घोटाले को लेकर एंटी करप्शन ब्यूरो यानी एसीबी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से आरोप लगाया कि सैकड़ों करोड़ रुपये के इस घोटाले में पुख्ता सबूत होने के बावजूद अब तक एक भी चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। मरांडी ने अंदेशा जताया कि जांच में जानबूझकर देरी की जा रही है ताकि आरोपियों को फायदा पहुंचाया जा सके।
बाबूलाल मरांडी ने अपनी पोस्ट में इस घोटाले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह देश के उन दुर्लभ मामलों में से एक होगा जहां घोटाले की जांच करने वाली एजेंसी और उसके अधिकारी खुद भविष्य में जांच के घेरे में आएंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह देरी महज एक प्रक्रिया है या फिर रसूखदार आरोपियों को सुरक्षा देने की एक सोची समझी कोशिश है।
घोटाले से जुड़े तथ्यों पर बात करते हुए मरांडी ने कहा कि एसीबी की अपनी जांच में ही भारी अनियमितताओं की पुष्टि हो चुकी है। मुख्यमंत्री के पूर्व सचिव सहित कई बड़े अधिकारियों की गिरफ्तारी और उनके बयान दर्ज होने के बावजूद 17 में से 14 आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिल गई है। यह बेल केवल इसलिए मिली क्योंकि एसीबी ने तय 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की। उन्होंने इसे कानून के साथ मजाक और जांच का गला घोंटने की कोशिश करार दिया।
विपक्ष के नेता ने चेतावनी दी कि उत्पाद विभाग से फाइलें भले ही गायब कर दी गई हों लेकिन डिजिटल साक्ष्य मिटाना नामुमकिन है। उन्होंने झारखंड की जनता को भरोसा दिलाया कि न्याय की चक्की थोड़ी धीमी जरूर है लेकिन वह बारीक पीसती है। मरांडी ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से भी इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है। फिलहाल इस मामले पर राज्य सरकार या एसीबी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
Also Read: गढ़वा में NEET को लेकर अलर्ट: केंद्रों के बाहर धारा 163 लागू, 200 मीटर तक पाबंदी


