Ranchi : झारखंड के खूंटी जिले में पुलिस हिरासत के दौरान एक नाबालिग बच्चे की बेरहमी से पिटाई के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने राज्य सरकार को अंतिम अल्टीमेटम देते हुए पीड़ित बच्चे शिवा कुमार सिंह को एक लाख रुपये का मुआवजा देने और दोषी पुलिस अधिकारी पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई चाइल्ड राइट्स फाउंडेशन की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए की गई है।
घटना के अनुसार, फरवरी 2025 में खूंटी पुलिस मानव तस्करी के एक संदिग्ध की तलाश में कोसंबी गांव पहुंची थी। आरोपी के घर पर मौजूद न होने के कारण पुलिस उसके 16 वर्षीय बेटे को जबरन उठाकर महिला थाने ले आई। आरोप है कि सब-इंस्पेक्टर संतोष रजक ने बच्चे की इतनी बेरहमी से पिटाई की कि वह चलने-फिरने की स्थिति में भी नहीं रहा। पुलिस का उद्देश्य बच्चे को पीटकर उसके पिता का पता ठिकाना जानना था।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस कृत्य की निंदा करते हुए इसे भारतीय न्याय संहिता और किशोर न्याय अधिनियम का खुला उल्लंघन बताया है। आयोग ने कहा कि दोषी अधिकारी ने नाबालिग के जीवन और गरिमा के अधिकार का हनन किया है।
झारखंड सरकार ने आयोग को बताया है कि मुआवजे की एक लाख रुपये की राशि को मंजूरी दे दी गई है और जल्द ही इसे पीड़ित परिवार को भेज दिया जाएगा। हालांकि, आयोग ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि दोषी पुलिस अधिकारी पर अब तक
आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल मुआवजा काफी नहीं है, कानून तोड़ने वाले अधिकारियों पर कानूनी कार्यवाही भी जरूरी है।
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