kolkata : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर चुनाव आयोग ने सुरक्षा के मोर्चे पर एक बेहद कड़ा और अभूतपूर्व कदम उठाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान की प्रक्रिया में कोई भी बाहरी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी कड़ी में, पूर्वी मेदिनीपुर जिले के अति-संवेदनशील और लोकप्रिय तटीय पर्यटन स्थलों दीघा, मंदरमनी, ताजपुर, उदयपुर और शंकरपुर को लेकर प्रशासन ने सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
आयोग के आदेश के मुताबिक, इन क्षेत्रों में मौजूद सभी पर्यटकों और गैर-निवासियों को मंगलवार शाम तक इलाका पूरी तरह खाली करने का निर्देश दिया गया है। यह आदेश केवल एक सुझाव नहीं, बल्कि एक अनिवार्य सुरक्षा प्रोटोकॉल है। स्थानीय प्रशासन ने इन इलाकों के सभी होटल मालिकों और होमस्टे संचालकों पर कड़ी निगरानी बैठा दी है।
बाहर के किसी भी व्यक्ति को कमरे उपलब्ध न कराए होटल प्रबंधन: आयोग
होटल प्रबंधन को साफ तौर पर हिदायत दी गई है कि मंगलवार शाम से लेकर 23 अप्रैल को मतदान प्रक्रिया संपन्न होने तक, जिले के बाहर के किसी भी व्यक्ति को कमरे उपलब्ध न कराए जाएं। चुनाव आयोग का यह कदम इस बात को सुनिश्चित करने के लिए है कि मतदान के दिन किसी भी बाहरी तत्व की मौजूदगी से चुनावी माहौल प्रभावित न हो और मतदाता बिना किसी भय या प्रलोभन के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
तटीय इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करते हुए पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों को भी सक्रिय कर दिया गया है। इन पर्यटन स्थलों के प्रवेश द्वारों पर निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि कोई भी संदेहास्पद व्यक्ति क्षेत्र में प्रवेश न कर सके। चुनाव आयोग का यह ‘जीरो टॉलरेंस’ वाला निर्णय, विशेषकर उन क्षेत्रों में सुरक्षा को प्राथमिकता देता है जहां बाहरी लोगों का जमावड़ा अक्सर सुरक्षा चुनौतियों को जन्म देता है।
शांतिपूर्ण मतदान संपन्न कराना ही उद्देश्य
आयोग की यह पहल पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। फिलहाल, तटीय क्षेत्रों में प्रशासन का ‘ऑपरेशन क्लीन-आउट’ जारी है और शांतिपूर्ण मतदान संपन्न कराना ही आयोग की एकमात्र प्राथमिकता है। बंगाल चुनाव से जुड़ी हर हलचल और ताजा अपडेट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।
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