Ranchi: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला में स्थित स्वर्णरेखा नदी के किनारे एक बार फिर दहशत का माहौल तब पसर गया जब बुधवार रात बहरागोड़ा थाना क्षेत्र के पानीपड़ा-नागुड़साई गांव के पास एक विशाल और संदिग्ध वस्तु बरामद हुई। ग्रामीणों, विशेषकर मछुआरों द्वारा देखे गए इस लगभग 227 किलोग्राम वजनी धातु के ढांचे के बारे में आशंका जताई जा रही है कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के दौर का अमेरिकी निर्मित AN-M64 500 lb जिंदा बम है।
यह घटना कोई इकलौता मामला नहीं है, बल्कि इससे पहले 17 और 24 मार्च 2026 को भी इसी नदी के तट पर दो समान शक्तिशाली बम पाए गए थे, जिन्हें भारतीय सेना ने सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया था। इन पुरानी खेपों के बार-बार मिलने से अब यह गंभीर सवाल खड़ा हो गया है कि स्वर्णरेखा नदी की गहराई में और कितने विस्फोटक दबे हुए हैं। फिलहाल भारतीय सेना की विशेष बम निरोधक टीम, जिसका नेतृत्व कैप्टन आयुष कुमार सिंह कर रहे हैं, घटनास्थल पर पहुंच चुकी है और पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है।

सेना के जवान इस विस्फोटक की प्रकृति और इसकी मारक क्षमता का विस्तृत आकलन कर रहे हैं ताकि इसे सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज किया जा सके। स्थानीय प्रशासन ने नदी के तट पर लोगों की आवाजाही को प्रतिबंधित करते हुए ग्रामीणों को किसी भी संदिग्ध वस्तु से छेड़छाड़ न करने की कड़ी हिदायत दी है। इस बार-बार घट रही घटना ने पूरे क्षेत्र के लोगों में भय पैदा कर दिया है, जो अब यह सोचने पर मजबूर हैं कि आखिर दशकों पुराना यह ‘विस्फोटक रहस्य’ नदी के किस हिस्से में और कितनी संख्या में छुपा हुआ है, जिसकी जांच प्रशासन और सेना की संयुक्त टीम द्वारा निरंतर जारी है।
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