Dhanbad : पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने अपनी बंद पड़ी खनन भूमि को वन क्षेत्र में बदलने की पहल शुरू कर दी है। महुदा क्षेत्र के बेलाखोंडा में स्थित करीब 9.81 एकड़ जमीन अब धनबाद वन प्रमंडल को सौंपी जा रही है, जहां बड़े स्तर पर वृक्षारोपण कर घना जंगल विकसित किया जाएगा।
वन विभाग को जमीन सौंपने की प्रक्रिया शुरू
बीसीसीएल ने तेतुलिया-2 पंचायत अंतर्गत बेलाखोंडा स्थित इस भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दोनों विभागों के बीच सहमति बनने के बाद औपचारिक कार्यवाही भी शुरू हो चुकी है। वन विभाग इस जमीन पर पौधारोपण कर इसे पूर्ण विकसित वन क्षेत्र में बदलेगा।
पहले कोयला खनन के लिए चिन्हित थी जमीन
यह जमीन पहले कोयला उत्खनन के लिए चिन्हित थी, लेकिन कई वर्षों से यहां खनन कार्य बंद पड़ा है। कुछ समय पहले इस क्षेत्र में अवैध खनन भी शुरू हो गया था, जिस पर स्थानीय स्तर पर विरोध हुआ। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए अवैध खनन पर रोक लगाई।
अब उगेंगे पेड़, बनेगा हराभरा इलाका
वन विभाग की योजना है कि इस जमीन पर बड़े पैमाने पर पौधे लगाए जाएं और इसे घने जंगल में तब्दील किया जाए। इससे न सिर्फ हरियाली बढ़ेगी, बल्कि जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलेगा। धनबाद वन प्रमंडल इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ा रहा है।
जमीन अदला-बदली समझौते का हिस्सा
यह पूरा मामला जमीन के आदान-प्रदान समझौते से जुड़ा है। इससे पहले वन विभाग ने बीसीसीएल को न्यू मधुवन वासरी समेत अन्य परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराई थी। अब उसी के बदले में बीसीसीएल अपनी जमीन वन विभाग को दे रही है।
पर्यावरण के लिए क्यों अहम है यह कदम
खनन क्षेत्रों की बंद पड़ी जमीन को वन क्षेत्र में बदलना पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी कदम माना जा रहा है। इससे प्रदूषण में कमी आएगी, स्थानीय तापमान संतुलित रहेगा और दामोदर नदी के किनारे होने के कारण मिट्टी कटाव को भी रोका जा सकेगा।
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