Ranchi : रांची की अदालत ने करीब 12 साल पुराने मामले में अहम फैसला सुनाया है। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी सार्थक शर्मा की अदालत ने महिला अधिवक्ता के साथ छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में आरोपी अधिवक्ता महेश तिवारी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।
दो साल की सजा और जुर्माना भी
अदालत ने आरोपी को विभिन्न धाराओं के तहत दो साल के सश्रम कारावास की सजा दी है। इसके साथ ही 19,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अगर जुर्माना नहीं दिया गया तो अतिरिक्त 123 दिन की जेल काटनी होगी।
कोर्ट परिसर में हुई थी घटना
यह मामला 1 मई 2012 का है। पीड़िता के अनुसार वह झारखंड हाई कोर्ट के कोर्ट नंबर-5 से बाहर निकल रही थीं, तभी आरोपी अधिवक्ता ने उनके साथ छेड़छाड़ की और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। विरोध करने पर आरोपी ने उन्हें थप्पड़ मारा, धक्का दिया और लात भी मारी।
थाने में दर्ज हुई थी एफआईआर
घटना के बाद पीड़िता ने डोरंडा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद मामला अदालत में चला और अब जाकर इस पर फैसला आया है।
गवाहों ने की पुष्टि
मामले में अभियोजन पक्ष ने चार गवाह पेश किए, जिनमें पीड़िता और प्रत्यक्षदर्शी शामिल थे। सभी गवाहों ने अदालत में एक जैसे बयान दिए, जिससे आरोप साबित होने में मदद मिली।
अदालत ने क्या कहा
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता का बयान भरोसेमंद है और अन्य गवाहों से उसकी पुष्टि होती है। साथ ही कोर्ट ने यह भी माना कि यह घटना हाई कोर्ट परिसर में हुई, जहां इस तरह के व्यवहार की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं की जा सकती।
पुरानी रंजिश बनी वजह
अदालत ने यह भी माना कि आरोपी और पीड़िता के बीच पहले से पेशेवर तनाव था। बार काउंसिल चुनाव में प्रतिद्वंद्विता को इस घटना की एक वजह माना गया।
कानून के रखवाले ही कटघरे में
इस मामले ने यह भी दिखाया कि कानून के पेशे से जुड़े लोगों से समाज को बेहतर आचरण की उम्मीद रहती है। ऐसे में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ संदेश दिया है कि किसी भी हाल में इस तरह की हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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