Godda : गोड्डा पावर प्लांट के दौरे पर पहुंचे अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी के लिए सबसे खास पल वह था, जब उनकी मुलाकात प्लांट परिसर में पढ़ने वाली कस्तूरबा बालिका विद्यालय की बच्चियों से हुई। ये मुलाकात औपचारिक नहीं, बल्कि एक अभिभावक और बच्चों के बीच आत्मीय बातचीत जैसी थी।
स्कूल की बच्चियों ने मुस्कुराते हुए उनका स्वागत किया। गौतम अदाणी भी उनके गए और बेहद सरल अंदाज में पूछा, “बेटा, पढ़ाई ठीक चल रही है? आपको और क्या चाहिए?”
बच्चियों ने बताया कि उन्हें अदाणी फाउंडेशन की ओर से मिल रही सुविधाओं से काफी मदद मिल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर स्कूल परिसर में कुछ और सुधार हो जाएं तो पढ़ाई और बेहतर हो सकती है। बच्चियों की बातें सुनकर गौतम अदाणी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी जरूरतों पर ध्यान दिया जाएगा।
दरअसल, कस्तूरबा बालिका विद्यालय उन बच्चियों के लिए एक उम्मीद है, जिनके पास पहले पढ़ाई का कोई साधन नहीं था। इनमें से कई बच्चियां बेहद गरीब परिवारों से आती हैं या ऐसी परिस्थितियों से, जहां पढ़ाई जारी रखना मुश्किल होता है। यहां उन्हें न सिर्फ शिक्षा, बल्कि एक सुरक्षित माहौल और अपने पैरों पर खड़े होने का सपना मिलता है।

किसानों से भी मिले, जाना हाल
अपने दौरे के दौरान गौतम अदाणी ने आसपास के गांवों के किसानों से भी मुलाकात की। उन्होंने किसानों से खेती, रोजगार और इलाके में आए बदलाव के बारे में बात की। किसानों ने बताया कि इलाके में बड़े प्रोजेक्ट आने से रोजगार के नए अवसर बने हैं।
देश की ऊर्जा ताकत का आधुनिक केंद्र
गोड्डा का 1600 मेगावाट का पावर प्लांट अदाणी पावर का एक बड़ा और आधुनिक प्रोजेक्ट है। करीब ₹16,000 करोड़ की लागत से बने इस प्लांट में नई अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे ज्यादा बिजली बनती है और प्रदूषण कम होता है। गौतम अदाणी ने प्लांट के कंट्रोल रूम और अलग-अलग यूनिट का निरीक्षण किया और इंजीनियरों व कर्मचारियों से बात की। इस दौरान वह कर्मचारियों के साथ कैंटीन में बैठकर लंच भी किया। उन्होंने कर्मचारियों से उनके काम और अनुभव के बारे में जाना।

विकास की असली तस्वीर
गौतम अदाणी का यह दौरा सिर्फ प्लांट देखने का कार्यक्रम नहीं था। कस्तूरबा स्कूल की बच्चियों से मुलाकात ने यह दिखाया कि विकास का मतलब सिर्फ बड़े-बड़े प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में बदलाव लाना भी है। एक तरफ गोड्डा पावर प्लांट देश को ऊर्जा दे रहा है, तो दूसरी तरफ उसी परिसर में पढ़ने वाली ये बच्चियां अपने जीवन को नई दिशा दे रही हैं। गोड्डा में यह तस्वीर बताती है कि जब उद्योग और शिक्षा साथ चलते हैं, तो रोशनी सिर्फ घरों में ही नहीं, बल्कि भविष्य में भी फैलती है।

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