New Delhi : दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में आज यानी सोमवार को लालू परिवार की लैंड फॉर जॉब केस की सुनवाई हुई। लालू प्रसाद यादव इस बार व्हीलचेयर पर कोर्ट पहुंचे। उनके साथ पत्नी राबड़ी देवी और सांसद बेटी मीसा भारती भी मौजूद थीं। कोर्ट के अंदर जब जज ने औपचारिक तौर पर आरोपों की जानकारी दी और पूछा कि क्या वे आरोप स्वीकार करते हैं, तो लालू यादव ने साफ कह दिया, “अभियोग स्वीकार नहीं, हम केस का सामना करेंगे।”
मीसा भारती का रुख
सुनवाई से पहले मीसा भारती ने कहा कि मामला कोर्ट में है और उन्हें न्याय में भरोसा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि “एक ही केस में इतने सारे मामले बन जाने से लोगों को दिक्कत हो रही है।”
कोर्ट रूम में क्या हुआ
कोर्ट में नियमों के तहत आरोपियों से पूछा गया कि क्या वे आरोप स्वीकार करते हैं या मुकदमे का सामना करेंगे।
- लालू यादव ने कहा : “अभियोग सिरे से खारिज करता हूँ, ट्रायल का सामना करूंगा।”
- राबड़ी देवी ने कहा : “मैं कानूनी लड़ाई के लिए तैयार हूँ और मुकदमों का सामना करूंगी।”
स्वास्थ्य कारणों से राहत
लालू और राबड़ी के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि उनकी सेहत ठीक नहीं रहती। कोर्ट ने इसे मान लिया और दोनों को व्यक्तिगत पेशी से स्थायी छूट दे दी। मतलब अब उन्हें हर सुनवाई में दिल्ली आने की जरूरत नहीं है।
दिल्ली की यात्रा और आरोप तय
लालू-राबड़ी रविवार शाम दिल्ली पहुंचे। कोर्ट ने परिवार के सदस्य तेजप्रताप, तेजस्वी यादव, मीसा भारती, हेमा यादव सहित कुल 41 लोगों पर आरोप तय किए। अब इन लोगों के खिलाफ मुकदमा चलेगा। वहीं, 52 लोगों को पहले ही बरी कर दिया गया है।
कोर्ट का कड़ा बयान
करीब 18 दिन पहले स्पेशल जज विशाल गोग्ने ने कहा था कि लालू यादव और उनका परिवार “एक आपराधिक गिरोह की तरह” काम कर रहा था। उनका कहना था कि सरकारी नौकरियों के बदले संपत्ति हासिल करने की व्यापक साजिश रची गई।
CBI के आरोपों पर कोर्ट की राय
कोर्ट ने CBI के दलीलों और चार्जशीट की समीक्षा के बाद कहा कि प्रारंभिक तौर पर जांच योग्य गंभीर आरोप सामने आए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि केस सिर्फ अनियमित नियुक्तियों का नहीं है, बल्कि एक संगठित आपराधिक साजिश का मामला है। लालू के रेल मंत्री रहते हुए यह साजिश 2004-2009 के दौरान की गई। इसमें जमीन का ट्रांसफर, कीमत में असामान्यता, परिवार और करीबी लोगों के नाम पर संपत्तियों का लेन-देन शामिल है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोप तय होना दोष सिद्ध होने की गारंटी नहीं है। बचाव पक्ष को ट्रायल में CBI के सबूतों को चुनौती देने का पूरा मौका मिलेगा।
चार्जशीट और साजिश
CBI ने चार्जशीट में कहा कि 2004 से 2009 के बीच, जब लालू यादव रेल मंत्री थे, बिहार के लोगों को रेलवे में ग्रुप-डी पदों पर बहाल किया गया। इसके बदले में आरोपियों ने अपनी जमीन लालू परिवार और एक कंपनी के नाम ट्रांसफर कर दी। CBI ने बताया कि कई मामलों में नौकरी मिलने से पहले ही जमीनें ट्रांसफर कर दी गई थीं। साथ ही दावा किया गया कि लालू परिवार ने नकद भुगतान भी लिया।
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