Deoghar : सी-डैक और एसटीपीआई देवघर की ओर से आयोजित हुल उन्नयन कार्यक्रम का शुभारंभ रविवार को देवघर में हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन सांसद एवं संसदीय स्थायी समिति (संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी) के अध्यक्ष डॉ. निशिकांत दुबे ने किया। इस मौके पर उन्होंने देवघर और झारखंड के विकास से जुड़ी कई बड़ी और अहम घोषणाएं कीं।
देवघर में बढ़ेगी हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर की आवाजाही
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि आने वाले समय में देवघर में हवाई जहाजों की संख्या में बड़ा इजाफा होगा। लोगों के आवागमन के लिए हेलीकॉप्टर का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इन विमानों और हेलीकॉप्टरों के मेंटेनेंस की सुविधा के साथ-साथ प्रशिक्षण केंद्र भी देवघर में इसी साल के अंत तक शुरू कर दिया जाएगा।
युवाओं को मिलेगा एविएशन और ड्रोन तकनीक का प्रशिक्षण
इस प्रशिक्षण केंद्र के खुलने से स्थानीय युवाओं को बड़ा फायदा होगा। यहां हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर के रखरखाव की तकनीक, ड्रोन तकनीक एवं पायलट प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे युवाओं को बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उन्हें यहीं रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
1.35 लाख बच्चों को मिलेगा सी-डैक का विशेष प्रशिक्षण
उन्होंने बताया कि झारखंड के करीब 1.35 लाख बच्चों को सी-डैक के माध्यम से विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस प्रशिक्षण के बाद युवा प्रमाण पत्र हासिल कर देश-विदेश में कहीं भी काम करने में सक्षम होंगे। कई छात्र आगे चलकर मास्टर ट्रेनर की भूमिका भी निभाएंगे।
साइबर अपराध पर लगाम लगाने में मदद करेंगे प्रशिक्षित युवा
सांसद ने कहा कि इस इलाके में साइबर क्राइम एक बड़ी समस्या है। सी-डैक से प्रशिक्षित युवा साइबर जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभाएंगे, जिससे साइबर अपराध पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।
देवघर में खुलेगा सी-डैक का 13वां सेंटर
उन्होंने बताया कि अभी देशभर में सी-डैक के कुल 12 सेंटर हैं और देवघर में 13वां सेंटर शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है।
इसके साथ ही सी-डैक आदिवासी बच्चों में पाई जाने वाली सिकल सेल एनीमिया बीमारी के इलाज और उन्मूलन की दिशा में भी अहम काम कर रहा है।
एम्स देवघर के साथ मिलकर होगा सिकल सेल एनीमिया पर काम
सी-डैक, एम्स देवघर के साथ मिलकर तकनीक की मदद से इस बीमारी के कारणों, खान-पान और जीवनशैली में बदलाव पर काम कर रही है, ताकि इस बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सके। डॉ. निशिकांत दुबे ने कहा कि सी-डैक कम लागत में नई-नई तकनीक विकसित कर भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। यहां तक कि अंतरिक्ष यान से जुड़े प्रशिक्षण में भी सी-डैक और सी-डॉट की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
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