Ranchi : झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राज्य के पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने एक बार फिर सीएम हेमंत सोरेन की सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए ट्वीट में उन्होंने सरकार से सवाल किया है कि झारखंड सरकार के खजाने से ₹10,000 करोड़ रुपये कहां गए, इसका अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया है।
मरांडी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सीएम हेमंत सोरेन के नेतृत्व में भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के कारण राज्य की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है और झारखंड को दिवालियेपन की कगार पर ला खड़ा किया गया है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन ने झारखंड को दिवालियापन की कगार पर ला खड़ा किया है।
झारखंड के शिक्षा विभाग के पास वेतन देने तक के लिए बजट नहीं बचा है। स्थिति यह है कि राज्य के 10 जिलों में हाई स्कूल शिक्षकों को पिछले 6 महीनों से वेतन नहीं मिला, जबकि 161…
— Babulal Marandi (@yourBabulal) February 4, 2026
शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का मुद्दा उठाया
नेता प्रतिपक्ष ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थिति पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने ट्वीट में लिखा कि झारखंड के शिक्षा विभाग के पास शिक्षकों को वेतन देने तक के लिए बजट नहीं बचा है। स्थिति यह है कि राज्य के 10 जिलों में हाई स्कूल शिक्षकों को पिछले छह महीनों से वेतन नहीं मिला है। इसके अलावा 161 शिक्षक-कर्मचारियों के वेतन के रूप में करीब ₹6.18 करोड़ का भुगतान लंबित है। मरांडी ने कहा कि वेतन संकट के साथ-साथ छात्रों की छात्रवृत्ति, पोशाक योजना, मिड-डे मील, पाठ्यपुस्तक वितरण और अन्य शैक्षणिक योजनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि विकास योजनाओं के नाम पर लूट, कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार ने राज्य के खजाने को खाली कर दिया है। मरांडी ने दावा किया कि ऊर्जा विभाग के खाते से ₹100 करोड़ की डकैती हो चुकी है। उन्होंने दोहराया कि कुल मिलाकर झारखंड सरकार के खजाने से ₹10,000 करोड़ रुपये कहां गए, इसका कोई हिसाब नहीं दिया जा रहा है।
अधिकारियों के वेतन पर रोक की मांग
बाबूलाल मरांडी ने मांग की कि जब तक शिक्षकों का बकाया वेतन नहीं दिया जाता, तब तक सीएम, मुख्य सचिव और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन पर रोक लगाई जानी चाहिए।
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