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    Home»जोहार ब्रेकिंग»हाथियों के आतंक से त्रस्त ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, वन विभाग का किया पुतला दहन
    जोहार ब्रेकिंग

    हाथियों के आतंक से त्रस्त ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, वन विभाग का किया पुतला दहन

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkJanuary 17, 2026No Comments3 Mins Read1
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    हाथियों
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    Chaibasa : चाईबासा जिले के टोंटो प्रखंड अंतर्गत नीमडीह गांव में शनिवार को हाथियों के बढ़ते आतंक और वन विभाग की कथित लापरवाही के विरोध में ग्रामीणों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया। आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग का पुतला दहन कर जमकर नारेबाजी की और हाथी प्रभावित इलाकों में तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिनों से हाथियों का झुंड गांव के आसपास डेरा डाले हुए है, जो लगातार घरों को तोड़ रहा है। इससे जान-माल का गंभीर खतरा बना हुआ है। कई बार सूचना देने के बावजूद वन विभाग के अधिकारी और कर्मी मौके पर नहीं पहुंच रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों बढ़ता जा रहा है। लोगों का आरोप है कि रात के समय हाथियों की आवाजाही से महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग दहशत में हैं और गांव में सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो चुका है।

    इस दौरान ग्रामीणों के बीच आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष जॉन मिरन मुंडा भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि हाथी स्वभाव से शांत और बुद्धिमान जानवर होता है, लेकिन आज उसका आक्रामक होना मानव जनित कारणों का परिणाम है। उन्होंने टाटा और रूंगटा जैसी कंपनियों के लिए जंगल और पहाड़ों में गलत तरीके से खनन, अवैध रूप से पेड़ों की कटाई और पर्यावरणीय संतुलन को नुकसान पहुंचाने को इसकी मुख्य वजह बताया। जॉन मिरन मुंडा ने आरोप लगाया कि वन विभाग की लापरवाही और मिलीभगत के कारण हाथियों का प्राकृतिक आवास नष्ट हुआ है, जिससे वे आबादी वाले इलाकों में प्रवेश कर रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि अब तक हाथियों के हमले में 22 लोगों की जान जा चुकी है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी वन विभाग पर है। यदि समय रहते विभाग ने गंभीरता से कदम उठाए होते तो इतनी जानें नहीं जातीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वन विभाग जंगलों में बसे आदिवासियों को छोटे-छोटे मामलों में परेशान करता रहा है, लेकिन जब आदिवासियों की जान पर बन आती है, तब विभाग गायब रहता है। अगर ग्रामीण अपनी जान-माल की सुरक्षा स्वयं नहीं करते तो हालात और भी भयावह हो सकते थे।

    ग्रामीणों और पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि वन विभाग जल्द से जल्द हाथियों को सुरक्षित वन क्षेत्रों में वापस नहीं पहुंचाता और प्रभावित गांवों में स्थायी समाधान नहीं करता, तो पूरे जिले में चक्का जाम किया जाएगा। उन्होंने झारखंड सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार जल, जंगल और जमीन की बात तो करती है, लेकिन हकीकत में झारखंड में कुछ भी सुरक्षित नहीं बचा है। आरोप लगाया गया कि मौजूदा सरकार पूंजीपतियों के हित में काम कर रही है।

    मुआवजे के मुद्दे पर भी नाराजगी जताई गई। जॉन मिरन मुंडा ने कहा कि पड़ोसी राज्य ओडिशा में हाथी हमले में मृतक परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है, जबकि झारखंड में यह राशि मात्र चार लाख रुपये है। उन्होंने मांग की कि हाथी हमले में मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा और क्षतिग्रस्त घरों के लिए 10 लाख रुपये दिए जाएं। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और सभी ने एक स्वर में वन विभाग व सरकार से त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की मांग की।

    Also Read : साइबर ठगी का ‘बादशाह’ गिरफ्तार, महाराष्ट्र के कारोबारी के म’र्डर का भी है आरोपी

    fed up with the menace of elephants vented their anger by burning an effigy of the forest department. villagers वन विभाग का किया पुतला दहन हाथियों हाथियों के आतंक से त्रस्त ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
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