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    Home»आदिवासी»असमः क्या आदिवासियों का फिर होगा विस्थापन? क्या है सरकार की योजना
    आदिवासी

    असमः क्या आदिवासियों का फिर होगा विस्थापन? क्या है सरकार की योजना

    Joharlive NetworkBy Joharlive NetworkJuly 15, 2026No Comments3 Mins Read0
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    असम में गुवाहाटी सिटी एक्सटेंशन प्रोजेक्ट को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. राभा हसोंग स्वायत्त परिषद (RHAC) क्षेत्र की जमीन अधिग्रहित करने की तैयारी का आदिवासी छात्र संगठनों ने कड़ा विरोध किया है. ऑल राभा स्टूडेंट्स यूनियन (ARSU) और ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (ABSU) ने सरकार से जमीन अधिग्रहण के सभी नोटिस तुरंत वापस लेने की मांग की है. संगठनों का कहना है कि यह फैसला आदिवासी समुदायों के अधिकारों और उनकी पहचान पर सीधा हमला है.

    आजीविका और सांस्कृतिक पहचान पर खतरा

    दोनों छात्र संगठनों ने संयुक्त बयान में कहा कि गुवाहाटी मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) जिन गांवों की जमीन अधिग्रहित करना चाहती है, वे राभा हसोंग स्वायत्त परिषद के दायरे में आते हैं. उनका कहना है कि इन इलाकों को गुवाहाटी विस्तार परियोजना में शामिल करने से परिषद के संवैधानिक अधिकार कमजोर होंगे और जनजाति समुदाय अपनी पुश्तैनी जमीन से बेदखल हो सकते हैं.

    राभा स्टूडेंट यूनियन के नेताओं का कहना है कि यह कदम राभा हसोंग स्वायत्त परिषद अधिनियम की भावना के खिलाफ है. उन्होंने बताया कि साल 2009 से ही संगठन इस तरह की किसी भी कोशिश का विरोध करता आ रहा है. उनका आरोप है कि विकास के नाम पर आदिवासी इलाकों की जमीन ली जा रही है, जिससे लोगों की आजीविका और सांस्कृतिक पहचान दोनों पर खतरा मंडरा रहा है.

    सरकार से नोटिस वापस लेने की मांग, आंदोलन की चेतावनी

    छात्र संगठनों ने यह भी दावा किया कि ट्राइबल बेल्ट और ब्लॉक के तहत संरक्षित कई गांवों को न्यू टाउन-3 परियोजना में शामिल करने की योजना बनाई जा रही है. उनका कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार अपनी खेती और पुश्तैनी जमीन खो देंगे.

    संगठनों ने राज्य सरकार से भूमि अधिग्रहण से जुड़े सभी नोटिस तुरंत रद्द करने और आदिवासी समुदायों के भूमि अधिकारों की रक्षा करने की मांग की है. उन्होंने साफ कहा कि अगर सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.

    वहीं, असम सरकार का कहना है कि गुवाहाटी सिटी एक्सटेंशन, सैटेलाइट सिटी और दूसरी शहरी विकास परियोजनाओं का मकसद शहर पर बढ़ते दबाव को कम करना और योजनाबद्ध तरीके से विकास करना है. सरकार ने 2026-27 के बजट में इन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का भी प्रावधान किया है.

    हालांकि, प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर स्थानीय लोगों और आदिवासी संगठनों की चिंता लगातार बढ़ रही है. उनका कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर आदिवासी क्षेत्रों की जमीन और उनके संवैधानिक अधिकारों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए.

    क्या है गुवाहाटी विस्तार परियोजना?

    गुवाहाटी विस्तार परियोजना असम सरकार की एक प्रस्तावित शहरी विकास योजना है, जिसका उद्देश्य गुवाहाटी महानगर का नियोजित विस्तार करना और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार करना है. इस योजना के तहत शहर से सटे क्षेत्रों का चरणबद्ध विकास किया जाएगा, ताकि बढ़ती आबादी और शहरीकरण के दबाव को संतुलित किया जा सके.

    परियोजना में नई सड़कें, पुल, जलापूर्ति, सीवरेज, बिजली, सार्वजनिक परिवहन, आवासीय कॉलोनियां, व्यावसायिक क्षेत्र, औद्योगिक क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल और अन्य नागरिक सुविधाओं के विकास का प्रस्ताव है. साथ ही शहर के बाहरी इलाकों में नई टाउनशिप विकसित करने और उन्हें गुवाहाटी से बेहतर सड़क व परिवहन नेटवर्क के जरिए जोड़ने की योजना है.

    इस परियोजना का उद्देश्य गुवाहाटी को पूर्वोत्तर भारत के एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और टिकाऊ महानगर के रूप में विकसित करना है, ताकि भविष्य में बढ़ती आबादी और आर्थिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें.

    Also Read : लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री बने हिमंत बिस्वा सरमा, ली शपथ

     

    असम ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन ऑल राभा स्टूडेंट्स यूनियन गुवाहाटी गुवाहाटी विस्तार परियोजना राभा हसोंग स्वायत्त परिषद
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