विजय उरांव
भारत में एक बार फिर से नागरिकता को लेकर बहस तेज हो गई है। इसका कारण विदेश मंत्रालय (MEA) का यह स्पष्टीकरण है कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण नहीं है। इसके साथ वे मुद्दे फिर से सामने आ गए जिसमें पुराने और नए निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया था कि आधार, वोटर आईडी, पैन कार्ड जैसे दास्तावेज अपने नागरिकता सिद्ध नहीं करते। यही वह बिंदू है जहां विपक्ष ने सरकार से गंभीर सवाल पूछने शुरू किए हैं। कांग्रेस वर्किंग कमिटी के मेंम्बर सुप्रिया श्रीनेत सवाल किया है कि “मोदी सरकार कहती है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो भारत का पासपोर्ट विदेशियों को भी दिया जा रहा है?, उन्होने यह भी सवाल किया है कि पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस क्या जांच करने आती है? जब आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है, पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, PAN नागरिकता का प्रमाण नहीं है, VOTER ID नागरिकता का प्रमाण नहीं है…. तो फिर नागरिकता का प्रमाण है क्या?
इस पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने औपचारिक एक्स हैंडल से पुछा है कि सरकार SIR के मामले पर कहती है कि अगर आप हाल की मतदाता सूची के आधार पर स्वत: पात्र नहीं है, तो नागरिकता और पात्रता से जुड़े निर्धारित दास्तावेज प्रस्तुत कीजिए। उस सूची में पासपोर्ट भी शामिल है, लेकिन दूसरी ओर कहा जाता है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं, केवल एक ट्रैवल डॉक्युमेंट है। JMM ने पुछा है कि अगर नागरिकता सिद्ध करने के लिए पासपोर्ट प्रयाप्त नहीं है, तो उसे SIR की स्वीकार्य दास्तावेज सूची में क्यों रखा गया है।
क्या कहते हैं जानकार
पासपोर्ट को लेकर कानूनी जानकारों की भी वही राय है जो विदेश मंत्रालय ने कहा है। क्योंकि भारतीय पासपोर्ट, पासपोर्ट एक्ट, 1967 के तहत भारतीय नागरिकों को जारी किया जाता है, जबकि नागरिकता, नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत नियंत्रित होती है।
खबरों के बाद, भारतीय विदेश सेवा अधिकारी और विदेश सचिव रही निरूपमा मेनन राव ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर जानकारी साझा की है। उनके अनुसार भारतीय पासपोर्ट, पासपोर्ट एक्ट, 1967 के तहत भारतीय नागरिकों को जारी किया जाता है, जबकि नागरिकता, नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत नियंत्रित होती है। लेकिन कानून और आम लोगों की समझ एक जैसी नहीं होती, ज्यादातर भारतीयों के लिए पासपोर्ट सबसे विश्वसनीय दास्तावेज है, क्योंकि उस पर रिपब्लिक ऑफ इंडिया लिखा होता है और व्यक्ति की पहचान दर्ज होती है। दुनियाभर में उसे इसलिए स्वीकार किया जाता है क्योंकि विदेशी सरकारों को भरोसा होता है कि भारत ने पासपोर्ट जारी करने से पहले उस व्यक्ति राष्ट्रीयता सत्यापन किया है।
निरूपमा आगे लिखती हैं कि पासपोर्ट नागरिकता तय नहीं करता, नागरिकता को अदालत में चुनौती दी जाए, तो पासपोर्ट अंतिम कानूनी दस्तावेज भी नहीं है, जो अकेले नागरिकता साबित कर दे। दुनियां के कई लोकतांत्रिक देसों की तरह भारत भी नागरिकता कानून और पासपोर्ट कानून के बीच अंतर स्पष्ट रखता है, धोखाधड़ी, विवाद या अवैध तरिके से नागरिकता हासिल करने जैसे मामले में नागरिकता का निर्धारण नागरिकता कानून, 1955 और उससे जुड़े साक्ष्यों के आधार पर ही करना पड़ेगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसका व्यवहारिक महत्व कम हो गया। पासपोर्ट तभी जारी होता है, जब सरकार यह सुनिश्चित कर ले कि आवेदक उसका पात्र है, विदेश मंत्रालय के बयान से यह वास्तविकता नहीं बदलती।
नागरिकता पर क्या कहता है संविधान?
नागरिकता से जुड़े सवाल का जवाब भारतीय संविधान के भाग 2 (अनुच्छेद 5 से 11) में दिया गया है। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के समय किन लोगों को भारतीय नागरिक माना जाएगा, इसका निर्धारण इन्हीं अनुच्छेद में किया गया है। लेकिन संविधान यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में नागरिकता से जुड़े सभी कानून बनाने का अधिकार संसद के पास होगा। इसी अधिकार के तहत संसद ने 1955 का नागरिकता अधिनयम (Citizenship Act, 1955) बनाया था। आज भारत में नागरिकता मुख्यत: चार आधारों पर प्राप्त होती है –
1. जन्म
2. वंश
3. पंजीकरण (Registration)
4. देशीयकरण (naturalization)
भारत में नागरिकता से जुड़े कानून में कई संशोधन हुए, विशेषकर 1986, 2003, 2005 और 2019 में। जानकारी के लिए बता दें कि भारत अपने प्रत्येक नागरिकों को कोई सार्वभौमिक “Citizenship Certificate” जारी नहीं करता है। यही वजह है कि अधिकांश भारतीयों के पास कोई ऐसा दास्तावेज नहीं है जिस पर साफ लिखा हो – “यह व्यक्ति भारत का नागरिक है”। नागरिकता प्रमाणपत्र केवल विशेष परिस्थितियों में जारी होता है, जैसे –
1. Registration
2. Naturalization
जन्म से नागरिक बने अधिकांश लोगों को ऐसा प्रमाणपत्र कभी जारी ही नहीं किया जाता।
किन दास्तावेजों को अंतिम प्रमाण नहीं मानती सरकार
हालिया सरकारी स्पष्टीकरण और विभिन्न कोर्ट निर्णयों के अनुसार नीचे दिए गए दास्तावेज अपने आप में नागरिकता का प्रमाण नहीं है।
पासपोर्ट, आधार, वोटर आईडी, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, निवास प्रमाण पत्र, रासनकार्ड, बीमा दास्तावेज, बैंक रिकार्ड आदि।
इनमें से प्रत्येक को किसी अलग उद्देश्य के लिए बनाया गया है, जैसे – आधार (पहचान के लिए), पैन(कर व्यवस्था के लिए), वोटर आईडी (चुनाव के लिए), पासपोर्ट (विदेश यात्रा के लिए)। इसका उद्देश्य नागरिकता प्रमाणित करना नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय
साल 2024 के वासुदेव दत्ता बनाम द स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल एंड अदरस में भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने जजमेंट दिया था कि आधार, वोटर आईडी और पैन कार्ड नागरिकता या राष्ट्रीयता का निर्णायक प्रमाण नहीं है। वहीं साल 2026 में Association for Democratic reforms & others बनाम Election commission of India & other with various writ petition के निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि आधार का उपयोग केवल पहचान के लिए किया जा सकता है, नागरिकता सिद्ध करने के लिए नहीं।
NRC और SIR में नागरिकता से जुड़ा सवाल बड़ा, क्यो?
NRC का उद्देश्य नागरिकों का रजिस्टर तैयार करना है। यदि कभी व्यापक स्तर पर NRC लागू किया जाता है, तो सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही होगा कि कौन सा दस्तावेज भारतीय नागरिकता साबित करेगा? यदि सरकार कहती है कि आधार, वोटर आईडी, पासपोर्ट नागरिकता के लिए पर्याप्त नहीं है। तो स्वभाविक है कि नागरिक पुछेंगे कि कौन सा दस्तावेज पर्याप्त होगा? यही वह कारण है जिसके चलते वर्तमान बहस दस्तावेज के लिए नहीं, बल्कि नागरिकता सत्यापन की पूरी प्रक्रिया पर है।
वहीं, SIR (Special Intensive revision) मतदाता सूची से जुड़ा है। चुंकि मतदान का अधिकार भारतीय नागरिकों को है, इसलिए मतदाता सूची में नाम शामिल करने या हटाने की प्रक्रिया में नागरिकता से जुड़े प्रश्न सामने आते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय में स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग नागरिकता का अंतिम निर्णायक प्राधिकरण नहीं है। यही कारण है कि SIR की प्रक्रिया में दस्तावेजों की प्रकृति और कानूनी सीमा पर बहस जारी है…
तो हमारे पास सबसे बड़ा सवाल सामने आता है कि नागरिकता कैसे सिद्ध होती है?
भारत में अक्सर एक दास्तावेज से नहीं, बल्कि उपलब्ध अभिलेखों (Records) के समग्र मूल्यांकन से की जाती है। इसमें जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता के दस्तावेज, पुराने भूमि रिकॉर्ड, स्कूल रिकॉर्ड, जनगणना अभिलेख, पूर्व निर्वाचन सूची, सरकारी सेवा रिकार्ड, नागरिकता प्रमाण पत्र (यदि जारी हुआ हो तो) इसका अर्थ है, नागरिकता का निर्धारण परिस्थितियों औऱ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है, न कि किसी एक कार्ड से।
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