झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन अभी शांत भी नहीं हुआ कि अब पड़ोसी राज्य बिहार में भी छात्र आंदोलन की आहट तेज हो गई है. झारखंड में JPSC और दूसरी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर छात्रों ने जिस तरह सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला, विधानसभा घेराव तक किया और पुलिस कार्रवाई का सामना किया, उसका असर अब बिहार में भी दिखाई देने लगा है.
बिहार में BPSC TRE 4, BSSC, 70वीं BPSC, दरोगा-सिपाही, लाइब्रेरियन और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थी लंबे समय से विज्ञापन और परीक्षा की तारीखों का इंतजार कर रहे हैं. अब छात्रों का कहना है कि सिर्फ तारीख पर तारीख नहीं, भर्ती का पूरा कैलेंडर और समय पर परीक्षा चाहिए.
छात्र नेता दिलीप कुमार ने सरकार और भर्ती आयोगों को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो छात्र सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे. इसी को लेकर 13 अगस्त को पटना के कृष्णा घाट पर बड़ी बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े छात्र प्रतिनिधि एक साथ बैठेंगे और तय करेंगे कि आंदोलन को किस दिशा में ले जाना है.
झारखंड में जो हुआ, उससे बिहार के छात्रों को क्या संदेश मिला?
झारखंड में छात्रों का आंदोलन सिर्फ एक भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं रहा. अलग-अलग परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों को लेकर छात्र एक मंच पर आए और सरकार से जवाब मांगने लगे. प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और छात्रों के घायल होने के बाद मामला और बड़ा हो गया. अब बिहार के छात्र भी अपनी अलग-अलग मांगों को एक साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.
यानी झारखंड में सड़क पर उतरे छात्रों का मुद्दा अब बिहार में भी एक बड़े सवाल को जन्म दे रहा है. क्या भर्ती परीक्षाओं में देरी और अनियमितताओं के खिलाफ दोनों राज्यों के युवा एक जैसी लड़ाई लड़ रहे हैं?
बिहार में आखिर छात्रों का गुस्सा क्यों बढ़ रहा है?
दिलीप कुमार का आरोप है कि सरकार और भर्ती आयोग लगातार तारीखें बता रहे हैं, लेकिन जमीन पर भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही. BPSC TRE 4 के विज्ञापन को लेकर जुलाई में प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन अगस्त का आधा महीना बीतने के बाद भी अभ्यर्थी इंतजार कर रहे हैं.
वहीं BSSC 2nd इंटर लेवल, CGL 4, BSS-BSO, दरोगा, कांस्टेबल और लाइब्रेरियन जैसी भर्तियों के उम्मीदवार भी अपनी-अपनी परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं.
13 अगस्त को तय होगा—बिहार में आंदोलन कितना बड़ा होगा?
कृष्णा घाट की बैठक में सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं के छात्र झारखंड की तरह एक साझा आंदोलन खड़ा करेंगे?
बैठक में संयुक्त आंदोलन या चरणबद्ध आंदोलन, 15 अगस्त के बाद प्रदर्शन की तारीख और आंदोलन के स्वरूप पर फैसला हो सकता है. यहां तक कि ‘बिहार बंद’ जैसे बड़े कदम पर भी चर्चा होने की बात कही जा रही है.
छात्रों की मांगों में TRE 4 का तत्काल नोटिफिकेशन, शिक्षक भर्ती के सभी खाली पदों को भरना, BSSC की परीक्षाओं की तारीख घोषित करना, 70वीं BPSC में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच, लाइब्रेरियन और BET की प्रक्रिया शुरू करना और दरोगा-सिपाही भर्ती में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है.
झारखंड में छात्रों का गुस्सा जिस तरह सड़क से विधानसभा तक पहुंचा, अब बिहार में 13 अगस्त की बैठक यह तय करेगी कि यहां का छात्र आंदोलन सिर्फ बैठक तक सीमित रहता है या फिर सड़कों पर एक बड़ा आंदोलन खड़ा होता है. फिलहाल नजर 13 अगस्त पर है, क्योंकि उस दिन सिर्फ बैठक नहीं, बल्कि बिहार के छात्र आंदोलन की अगली दिशा तय हो सकती है.

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