Ranchi : उच्च शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर आदिवासी छात्र संघ का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला और पांच सूत्री मांग पत्र सौंपा। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिनका समाधान जरूरी है। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश देने की अपील की।
उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग
छात्र संघ का कहना है कि राज्य के कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में आधारभूत सुविधाओं की कमी है। शिक्षकों के रिक्त पद, समय पर परीक्षा नहीं होना, रिजल्ट में देरी और शैक्षणिक संसाधनों की कमी जैसी समस्याएं छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर रही हैं। संघ ने मांग की कि उच्च शिक्षा संस्थानों में जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिले। ज्ञापन में छात्रवृत्ति से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि कई छात्रों को समय पर छात्रवृत्ति नहीं मिलती, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। उन्होंने मांग की कि छात्रवृत्ति वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए ताकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को राहत मिल सके।
आदिवासी छात्रों के लिए विशेष सुविधाओं की मांग
संघ ने आदिवासी और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले छात्रों के लिए छात्रावास, पुस्तकालय और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं को मजबूत करने की भी मांग की। उनका कहना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में कई अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए विशेष योजनाएं और सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
राज्यपाल से सकारात्मक पहल की उम्मीद
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को बताया कि उनकी मांगें केवल छात्र हित से जुड़ी हैं और इन पर कार्रवाई होने से राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। राज्यपाल से मुलाकात के बाद छात्र संघ के सदस्यों ने उम्मीद जताई कि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल होगी और छात्रों की समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। छात्र नेताओं ने कहा कि किसी भी राज्य के विकास में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में उच्च शिक्षा संस्थानों को मजबूत करना और छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में छात्रों के व्यापक हित में आंदोलन का रास्ता भी अपनाया जा सकता है।
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