Ranchi : झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रही अटकलों के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बड़ा फैसला लिया है। पार्टी ने बैजनाथ राम को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया है। इस फैसले के साथ ही राज्य की सियासत में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा चुनाव को लेकर पिछले कई दिनों से विभिन्न नामों की चर्चा हो रही थी। ऐसे में झामुमो द्वारा बैजनाथ राम के नाम पर मुहर लगाने को महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम माना जा रहा है।
उम्मीदवारों को लेकर चल रहा था मंथन
राज्यसभा चुनाव की घोषणा के बाद झामुमो लगातार अपने उम्मीदवारों के नाम पर विचार-विमर्श कर रहा था। पार्टी की बैठकों में कई नामों पर चर्चा हुई और अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व पर छोड़ दिया गया था। झामुमो ने पहले ही संकेत दे दिया था कि वह राज्यसभा की दोनों सीटों पर अपना दावा मजबूत तरीके से पेश करेगी। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में यह चुनाव संगठन की ताकत दिखाने का भी अवसर है।
गठबंधन की राजनीति के बीच आया फैसला
राज्यसभा चुनाव को लेकर झामुमो और कांग्रेस के बीच भी राजनीतिक चर्चाएं जारी थीं। कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद गठबंधन के भीतर सीटों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। ऐसे माहौल में बैजनाथ राम को उम्मीदवार बनाए जाने को झामुमो की रणनीतिक चाल माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले का असर आने वाले दिनों में गठबंधन की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है। झारखंड में इस बार दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है। एक सीट झामुमो संस्थापक शिबू सोरेन के निधन के बाद रिक्त हुई थी, जबकि दूसरी सीट का कार्यकाल पूरा हो रहा है। चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हुए हैं।
समर्थकों में उत्साह, विरोधियों की नजर भी टिकी
बैजनाथ राम के नाम की घोषणा के बाद झामुमो कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि उनका उम्मीदवार मजबूती से चुनाव मैदान में उतरेगा। वहीं विपक्षी दल भी अब झामुमो की आगे की रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं। राज्यसभा चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही झारखंड की राजनीति और भी दिलचस्प होती जा रही है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नामांकन और राजनीतिक समीकरणों पर सबकी नजर रहेगी।
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