रांची: जल संसाधन विभाग के तीन इंजीनियरों के लिए छह साल की देरी से मिली प्रोमोशन का लाभ अब पिछली तारीख से मिलेगा. झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि तीनों को 20 नवंबर 2012 से सहायक अभियंता के पद पर प्रोमोशन का लाभ दिया जाए. विभाग ने 2018 में उन्हें प्रोमोशन तो दी थी, लेकिन 2012 से लाभ देने से इनकार कर दिया था. अब अदालत ने विभाग के इस फैसले को रद्द करते हुए सभी परिणामी लाभ देने का आदेश दिया है. सरकार को पूरी प्रक्रिया 12 सप्ताह में पूरी करनी होगी.
मामले में रॉबिन अजय सिंह, पंकज कुमार और संदीप कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. तीनों की नियुक्ति 13 नवंबर 2007 को स्वीकृत एवं रिक्त पदों के विरुद्ध कनीय अभियंता (मैकेनिकल) के पद पर हुई थी. याचिकाकर्ताओं के पास एएमआइई की डिग्री थी. उनका कहना था कि निर्धारित पांच साल की सेवा अवधि पूरी करने के बाद वे नवंबर 2012 से सहायक अभियंता के पद पर प्रोमोशन के योग्य हो गये थे. इसके बावजूद विभाग ने उन्हें 20 नवंबर 2018 को प्रोन्नति दी.
पहले भी हाईकोर्ट पहुंचे थे इंजीनियर
प्रोमोशन में देरी को लेकर तीनों इंजीनियरों ने वर्ष 2014 में भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. इस पर 10 नवंबर 2016 को अदालत ने आदेश पारित किया. इसके बाद विभाग ने 20 नवंबर 2018 को उन्हें सहायक अभियंता के पद पर प्रोमोट किया. हालांकि, प्रोमोशन की वास्तविक पात्रता की तारीख नवंबर 2012 से लाभ नहीं मिलने पर तीनों ने फिर अदालत का दरवाजा खटखटाया.
इस याचिका पर 24 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट ने विभागीय सचिव को संबंधित अभिलेखों की जांच कर कारणयुक्त आदेश पारित करने और परिणामी लाभ देने के संबंध में निर्णय लेने का निर्देश दिया था.
सीबीआइ जांच को बनाया था प्रोन्नति रोकने का आधार
अदालत के निर्देश के बाद विभाग ने 19 जनवरी 2026 को तीनों का दावा खारिज कर दिया. विभाग ने इसके लिए सीबीआइ जांच लंबित होने, झारखंड इंजीनियरिंग सेवा नियुक्ति नियमावली 2016, झारखंड सेवा संहिता के नियम 58 और झारखंड वित्त नियमावली के नियम 74 का हवाला दिया था. इसके खिलाफ तीनों इंजीनियरों ने फिर हाईकोर्ट में चुनौती दी.
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन ने अदालत में दलील दी कि नवंबर 2012 में उनके खिलाफ न तो प्राथमिकी दर्ज थी और न ही कोई आरोप पत्र दाखिल हुआ था. उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही में भी आरोप गठित नहीं किये गये थे.
उन्होंने राज्य सरकार के 20 नवंबर 2008 के संकल्प का हवाला देते हुए कहा कि निलंबन, विभागीय कार्यवाही में आरोप गठित होने या आपराधिक मामले में आरोप पत्र दाखिल होने की स्थिति में ही प्रोन्नति रोकी जा सकती है.
अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि केवल प्रारंभिक सीबीआइ जांच लंबित होने के आधार पर प्रोमोशन रोकना उचित नहीं है. कोर्ट ने यह भी कहा कि झारखंड इंजीनियरिंग सेवा नियुक्ति नियमावली 2016 को नवंबर 2012 से लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसे पूर्वव्यापी प्रभाव नहीं दिया गया है.
कार्यपालक अभियंता की प्रोमोशन पर भी होगा विचार
अदालत ने डॉ. पारसनाथ प्रसाद बनाम बिहार राज्य समेत पूर्व के न्यायिक फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि नियोक्ता की गलती से हुई देरी का खामियाजा कर्मचारी को नहीं भुगतना चाहिए.
इसी आधार पर जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने 19 जनवरी 2026 के विभागीय आदेश को निरस्त कर दिया. कोर्ट ने राज्य सरकार को तीनों इंजीनियरों को 20 नवंबर 2012 से सहायक अभियंता (मैकेनिकल) के पद पर प्रोमोशन का लाभ देने और सभी परिणामी लाभ प्रदान करने का निर्देश दिया है.
इसके अलावा, सहायक अभियंता के पद पर प्रोमोशन मिलने के बाद तीनों के कार्यपालक अभियंता के पद पर प्रोन्नति के दावे पर भी निर्धारित सेवा अवधि और लागू नियमों के अनुसार विचार करना होगा. अदालत ने पूरी प्रक्रिया 12 सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है.
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