Palamu : झारखंड के पलामू जिले के सतबरवा प्रखंड में करोड़ों की लागत से शुरू हुई नल-जल योजना अब सवालों के घेरे में है। करीब 29 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद पांच पंचायत के 29 गांवों में आज तक शुद्ध पेयजल नहीं पहुंच पाया है। छह साल बीत गए, लेकिन हालात जस के तस हैं। करीब 30 हजार आबादी आज भी पानी के लिए जूझ रही है।
पाइप बिछे, टंकी बनी, पर नलों में पानी नहीं
योजना के तहत 2019-20 में पाइपलाइन बिछाई गई, जल मीनार बनाए गए और औरंगा नदी व मलय डैम से पानी सप्लाई की व्यवस्था की गई। रबदा, पोंची, बकोरिया, दुलसुलमा और सतबरवा पंचायत के गांवों को इससे जोड़ने की योजना थी। लेकिन हकीकत यह है कि कई घरों में आज तक नल ही नहीं लगे, और जहां लगे हैं वहां एक बूंद पानी नहीं पहुंचा।
गर्मी बढ़ी तो बढ़ी परेशानी
गर्मी शुरू होते ही हालात और बिगड़ गए हैं। जलस्तर नीचे जा रहा है और लोग चापानल और कुएं के भरोसे हैं। अंबेडकर नगर, अंसार मोहल्ला समेत कई इलाकों में पानी के लिए रोज संघर्ष करना पड़ रहा है। ग्रामीणों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों में नाराजगी, भ्रष्टाचार के आरोप
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में योजना को लेकर गहरी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। पाइपलाइन बिछाने के दौरान कई सड़कों को भी खराब कर दिया गया, जिससे आने-जाने में भी परेशानी हो रही है।
“योजना पूरी तरह फेल” – मुखिया संघ अध्यक्ष
पोंची पंचायत के मुखिया और मुखिया संघ के अध्यक्ष गिरवर प्रसाद राम का कहना है कि हर घर नल-जल योजना पूरी तरह फेल हो चुकी है। शुरुआत में लोगों को उम्मीद थी कि गांवों में पानी की समस्या खत्म होगी, लेकिन अब लोग निराश हो गए हैं। उन्होंने सरकार से इस पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
“नल लगा, पानी नहीं आया” – ग्रामीणों का दर्द
ग्रामीणों की शिकायत है कि विभाग की लापरवाही के कारण उन्हें पेयजल की समस्या झेलनी पड़ रही है। मुक्ता गांव के मोहम्मद रब्बानी अंसारी कहते हैं कि नल तो लगाया गया, लेकिन आज तक पानी नहीं आया। वहीं हलुमांड गांव के योगेंद्र भुइयां और स्थानीय व्यवसायी सतीश कुमार गुप्ता ने भी कहा कि ट्रायल के बाद भी पानी सप्लाई नहीं होना बेहद निराशाजनक है।
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