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    Home»झारखंड»2500 फार्मासिस्टों का रजिस्ट्रेशन खतरे में, 15 दिन में जवाब नहीं तो निबंधन रद्द
    झारखंड

    2500 फार्मासिस्टों का रजिस्ट्रेशन खतरे में, 15 दिन में जवाब नहीं तो निबंधन रद्द

    Team JoharBy Team JoharJanuary 23, 2026Updated:January 23, 2026No Comments3 Mins Read5
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    फार्मेसी
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    Ranchi : झारखंड सरकार के अधीन झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल ने राज्य के उन फार्मासिस्टों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है, जिन्होंने बीते दो वर्षों या उससे अधिक समय से अपने रजिस्ट्रेशन का नवीकरण नहीं कराया है। ऐसे फार्मासिस्टों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है।

    इस संबंध में काउंसिल के निबंधक सह सचिव प्रशांत कुमार पांडेय ने आदेश जारी करते हुए संबंधित फार्मासिस्टों से 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। आदेश में कहा गया है कि हर वर्ष रजिस्ट्रेशन का नवीकरण अनिवार्य है और निर्धारित समय में जवाब नहीं देने की स्थिति में यह मान लिया जाएगा कि संबंधित फार्मासिस्ट को इस पर कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद काउंसिल आगे की कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होगी।

    2500 फार्मासिस्ट नहीं करा रहे नवीकरण

    काउंसिल के अनुसार वर्तमान में झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल में 16,787 फार्मासिस्ट निबंधित हैं, जिनमें से लगभग 2500 फार्मासिस्टों ने रजिस्ट्रेशन का नवीकरण नहीं कराया है। इसके अलावा सैकड़ों फार्मासिस्ट ऐसे भी हैं, जिनका निबंधन दो राज्यों की फार्मेसी काउंसिल में दर्ज है। यानी बिना एक राज्य से निबंधन स्थानांतरण कराए उन्होंने झारखंड काउंसिल में पंजीकरण करा लिया है।

    ऑनलाइन नवीकरण में आ रही तकनीकी परेशानी

    कई फार्मासिस्टों ने नवीकरण प्रक्रिया में तकनीकी खामियों की शिकायत की है। रिम्स में लगभग 30 वर्षों तक फार्मासिस्ट के रूप में कार्य कर 2016 में सेवानिवृत्त हुए अरबिंद प्रसाद सिंह ने बताया कि उनका निबंधन दिसंबर 2025 तक वैध है, लेकिन पिछले एक सप्ताह से ऑनलाइन नवीकरण के प्रयास के बावजूद उन्हें ओटीपी प्राप्त नहीं हो रहा है।

    उन्होंने कहा कि इस तरह की समस्या केवल उनके साथ ही नहीं, बल्कि हजारों फार्मासिस्टों को झेलनी पड़ रही है। फार्मासिस्टों का आरोप है कि जानबूझकर ओटीपी नहीं भेजा जाता, ताकि वे काउंसिल कार्यालय आने को मजबूर हों।

    कार्यालय में ‘चढ़ावा’ का आरोप

    कुछ फार्मासिस्टों ने आरोप लगाया है कि काउंसिल कार्यालय में बिना कथित ‘चढ़ावा’ दिए न तो निबंधन होता है और न ही नवीकरण किया जाता है। इसी कारण कई फार्मासिस्ट कार्यालय आने से बचते हैं।

    काउंसिल ने आरोपों को बताया निराधार

    इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए काउंसिल के निबंधक सह सचिव प्रशांत कुमार पांडेय ने कहा कि फार्मासिस्ट अपनी गलतियों का ठीकरा कार्यालय पर फोड़ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि निबंधन और नवीकरण शुल्क ही काउंसिल के राजस्व का एकमात्र स्रोत है।

    उन्होंने कहा कि नवीकरण नहीं होने से सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है और सही डेटा भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ओटीपी से जुड़ी शिकायतों पर उन्होंने बताया कि पहली बार ऑनलाइन निबंधन या नवीकरण के समय मिले पासवर्ड को फार्मासिस्ट सुरक्षित नहीं रखते, जिससे बाद में तकनीकी परेशानी आती है। फोन पर ओटीपी देने को लेकर उन्होंने कहा कि कई फार्मासिस्ट दवा दुकानों से जुड़े होते हैं, ऐसे में फोन पर यह पहचान कर पाना मुश्किल होता है कि कॉल करने वाला वास्तव में फार्मासिस्ट है या दुकानदार।

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