Johar Live Desk : कपड़ों को ज्यादा मुलायम, चमकदार और खुशबूदार बनाने के लिए लोग आमतौर पर फैब्रिक कंडीशनर का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो कपड़ों की यह खुशबू और नरमी सेहत के लिए नुकसानदेह भी हो सकती है। फैब्रिक कंडीशनर में मौजूद कई केमिकल लंबे समय तक कपड़ों पर टिके रहते हैं और धीरे-धीरे शरीर को प्रभावित कर सकते हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि फैब्रिक सॉफ्टनर में क्वाटरनरी अमोनियम कंपाउंड, आर्टिफिशियल खुशबू, सिलिकॉन और वॉलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड (VOCs) पाए जाते हैं। ये केमिकल सांस के जरिए या त्वचा के संपर्क में आकर एलर्जी, अस्थमा, सांस लेने में परेशानी, सिरदर्द और चक्कर जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में खुजली, रैशेज और सूजन की शिकायत अधिक देखी जाती है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक रिपोर्ट के अनुसार, फैब्रिक कंडीशनर में इस्तेमाल होने वाली आर्टिफिशियल खुशबू से निकलने वाले VOCs लंबे समय तक सांस और त्वचा से जुड़ी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इनमें अस्थमा अटैक, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, न्यूरोलॉजिकल समस्याएं और हार्मोन असंतुलन शामिल हैं। कुछ मामलों में इन केमिकल्स का असर मेटाबॉलिज्म पर भी पड़ता है, जिससे वजन बढ़ने और इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा रहता है।
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मधुसूदन पात्रुडू का कहना है कि कई कंपनियां फैब्रिक सॉफ्टनर में इस्तेमाल होने वाले सभी केमिकल्स की जानकारी लेबल पर नहीं देतीं। ऐसे में उपभोक्ता अनजाने में ऐसे उत्पाद इस्तेमाल करते रहते हैं, जो लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने सलाह दी कि जितना हो सके केमिकल-आधारित फैब्रिक कंडीशनर से बचना चाहिए।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि फैब्रिक कंडीशनर घर के अंदर की हवा को प्रदूषित कर सकते हैं। इनमें मौजूद थैलेट्स और अन्य केमिकल हवा में घुलकर इनडोर एयर पॉल्यूशन बढ़ाते हैं। साथ ही ये कपड़ों पर मोम जैसी परत छोड़ देते हैं, जिससे कपड़े की सोखने की क्षमता घट जाती है और त्वचा पर बुरा असर पड़ सकता है। ये केमिकल पर्यावरण के लिए भी हानिकारक माने जाते हैं, क्योंकि ये आसानी से नष्ट नहीं होते और पानी व मिट्टी को प्रदूषित करते हैं।
विशेषज्ञ प्राकृतिक विकल्प अपनाने की सलाह देते हैं। सफेद सिरका और बेकिंग सोडा कपड़ों को नरम करने के साथ बदबू भी दूर करते हैं। ऊन के ड्रायर बॉल्स का इस्तेमाल भी एक सुरक्षित तरीका माना जाता है। इसके अलावा पौधों से बने डिटर्जेंट कपड़ों को बिना नुकसान के साफ और मुलायम रखते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्राकृतिक उपाय अपनाकर न सिर्फ कपड़ों की देखभाल की जा सकती है, बल्कि सेहत और पर्यावरण दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।


