Ranchi/Bokaro : बोकारो के चर्चित तेतुलिया मौजा वन भूमि मामले में बड़ी कानूनी हलचल हुई है। झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस संजय द्विवेदी की अदालत ने इस मामले में आरोपी शैलेश सिंह और राजवीर कंस्ट्रक्शन के विमल अग्रवाल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले के बाद दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावना तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला बोकारो के तेतुलिया मौजा स्थित वन भूमि से जुड़ा है। आरोप है कि जमीन के नेचर को बदलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उसी आधार पर म्यूटेशन और जमाबंदी करा ली गई। इस पूरे मामले की जांच अपराध अनुसंधान विभाग कर रहा है। सीआईडी का कहना है कि जांच के दौरान पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि जमीन से संबंधित कागजात में गड़बड़ी की गई। केस डायरी में भी फर्जीवाड़े का विस्तृत उल्लेख किया गया है। इसी आधार पर विभाग ने पहले भी कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
इस मामले में सीआईडी पहले इजहार हुसैन, अख्तर हुसैन और राजवीर कंस्ट्रक्शन के निदेशक पुनीत अग्रवाल को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। वहीं शैलेश सिंह और विमल अग्रवाल के खिलाफ वारंट भी जारी किया गया था। हालांकि, उच्च न्यायालय द्वारा पीड़ात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाए जाने के कारण अब तक दोनों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी। अब जब अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है, तो सीआईडी की कार्रवाई का रास्ता साफ माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में भी चल रही सुनवाई
इस मामले से जुड़ी एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने बोकारो जिला प्रशासन से संबंधित जमीन के नेचर को लेकर दस्तावेजी रिपोर्ट मांगी है। इससे साफ है कि मामला सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी कानूनी समीक्षा हो रही है।
अब आरोपियों के पास क्या विकल्प
कानूनी जानकारों के मुताबिक, अगर सीआईडी दोनों आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करती है, तो उनके पास दो रास्ते बचते हैं। पहला, वे सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए अपील कर सकते हैं। दूसरा, वे अदालत में सरेंडर कर नियमित जमानत याचिका दाखिल कर सकते हैं।
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