New Delhi: आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होते ही पूर्व राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने पार्टी नेतृत्व और अरविंद केजरीवाल पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। उन्होंने एक बार फिर मई 2024 की उस विवादास्पद घटना को उठाया है, जब उनके साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री आवास पर मारपीट हुई थी। मालीवाल ने सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया है कि वह हमला केजरीवाल की मौजूदगी और उन्हीं के निर्देश पर हुआ था।
पुरानी घटना पर फिर गहराया विवाद
मालीवाल ने उस घटना को याद करते हुए कहा, “जब आपका पालतू गुंडा मेरे साथ मारपीट कर रहा था, गाली-गलौज कर रहा था और अश्लील व्यवहार कर रहा था, तो आपको शर्म नहीं आई? आपके घर में आपके ही प्राइवेट गुंडों ने मुझे पीटा।” ज्ञात हो कि मई 2024 में स्वाति मालीवाल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री आवास पर अरविंद केजरीवाल के पूर्व पर्सनल असिस्टेंट बिभव कुमार पर बदसलूकी, थप्पड़ मारने और शारीरिक हिंसा का आरोप लगाया था। उस समय इस मामले ने देशभर में राजनीतिक भूचाल ला दिया था। हालाँकि, उस दौरान आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे बीजेपी की साजिश करार दिया था और मालीवाल पर चरित्र हनन के आरोप लगाए थे।
7 सांसदों का सामूहिक इस्तीफा और राजनीतिक संकट
यह तीखा बयान ऐसे समय पर आया है जब 24 अप्रैल 2026 को स्वाति मालीवाल समेत AAP के सात राज्यसभा सांसदों ने राघव चड्ढा के नेतृत्व में पार्टी का दामन छोड़ दिया है और भाजपा में शामिल हो गए हैं। इस सामूहिक इस्तीफे ने आम आदमी पार्टी के भीतर जारी आंतरिक कलह को सतह पर ला दिया है। जहाँ एक तरफ AAP ने इस घटनाक्रम को “ऑपरेशन लोटस” बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा है, वहीं दूसरी तरफ स्वाति मालीवाल और उनके साथी नेताओं ने पार्टी में लोकतंत्र की कमी, भ्रष्टाचार और महिलाओं के प्रति संवेदनहीनता को अपने इस्तीफे का मुख्य आधार बताया है।
भविष्य की राजनीति पर असर
मालीवाल का यह बयान न केवल उनके और केजरीवाल के बीच के व्यक्तिगत संबंधों को उजागर करता है, बल्कि यह AAP की साख के लिए भी बड़ी चुनौती है। पंजाब विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस तरह की बगावत और गंभीर आरोप पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकते हैं। विशेषज्ञ इसे AAP के लिए एक बड़े ‘पॉलिटिकल क्राइसिस’ के रूप में देख रहे हैं, जहाँ अब पार्टी को अपने नेतृत्व और सिद्धांतों पर उठ रहे सवालों के जवाब देने होंगे।
Also Read : पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में पुनर्मतदान की जरूरत नहीं : चुनाव आयोग


