Ranchi : राजधानी में रविवार को ईरान और फिलिस्तीन पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के विरोध में प्रदर्शन हुआ। इस मौके पर सीपीआई सहित कई वामपंथी और जनवादी संगठनों के कार्यकर्ता अल्बर्ट एक्का चौक पर जमा हुए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र की मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि उसने अपनी विदेश नीति बदलकर साम्राज्यवादी ताकतों का पिछलग्गू बनने का रास्ता अपनाया है।
हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर किया विरोध
रविवार दोपहर को प्रदर्शनकारी अपने हाथों में बैनर, पोस्टर और झंडे लेकर चौक पर पहुंचे। उनका मुख्य एजेंडा था ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमले को तुरंत रोकना और मध्य पूर्व में जारी हिंसा को समाप्त करना। कार्यकर्ताओं ने जोर देकर कहा कि इजरायल फिलिस्तीन का नामोनिशान मिटाने पर आमादा है और ईरान पर बेबुनियाद आरोप लगाकर युद्ध का दायरा बढ़ा रहा है।
नेताओं ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर जताया विरोध
प्रदर्शन के दौरान विभिन्न नेताओं ने केंद्र सरकार के रवैये पर कड़ा ऐतराज जताया। उनका कहना था कि भारत को अपनी विदेश नीति में तटस्थता बनाए रखनी चाहिए और साम्राज्यवादी ताकतों के दबाव में आकर किसी भी युद्ध में शामिल नहीं होना चाहिए।
माले नेता मनोज भक्त ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
झारखंड सीपीआई माले के राज्य सचिव मनोज भक्त ने कहा कि अमेरिकी-इजरायली नापाक गठजोड़ से पूरी दुनिया के सामने बड़ा खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान पर हमले को तुरंत रोका जाना चाहिए। मनोज भक्त ने केंद्र की मोदी सरकार पर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय मसले पर सरकार की चुप्पी ठीक नहीं है।
सीपीएम नेता सुखराम लोहरा की चेतावनी
सीपीएम नेता सुखराम लोहरा ने कहा कि देश की तमाम जनवादी और वामपंथी संगठन इस अमेरिकी-इजरायली दादागिरी के खिलाफ एकजुट हैं। उनका कहना था कि भारत को इस युद्ध को रोकने के लिए सक्रिय पहल करनी चाहिए और वैश्विक स्तर पर शांति कायम करने में अपना रोल निभाना चाहिए।
APPWA की नंदिता ने बताया हमला का असली मकसद
ऑल इंडिया प्रगतिशील महिला संगठन (AIPWA) की राज्य प्रमुख नंदिता ने कहा कि देश की जनता और जनवादी संगठन जो समझ रहे हैं, वही मोदी सरकार नहीं समझ रही। उनका कहना था कि ईरान पर यह हमला जमीन, तेल और अमेरिका की कमजोर आर्थिक स्थिति को छुपाने के लिए किया गया। उन्होंने इसे अमेरिकी-इजरायली गुंडागर्दी बताया।
शांतिपूर्ण लेकिन असरदार प्रदर्शन
प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से हुआ, लेकिन इसकी आवाज़ केंद्र और स्थानीय प्रशासन तक पहुंचाई गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे लगातार ऐसी गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे और वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार और न्याय की पैरवी करते रहेंगे।
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