Ranchi :सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनकी सात साल की सजा को निलंबित करते हुए जमानत दे दी है। इस फैसले के बाद एक्का को बची जेल से राहत मिल गई है, हालांकि मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
कोर्ट की शर्त: जमीन बहाली में करना होगा सहयोग
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते समय एक अहम शर्त भी रखी है। अदालत ने निर्देश दिया है कि एनोस एक्का एक हलफनामा दाखिल करें, जिसमें वे आदिवासी जमीन को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने में सहयोग करने की बात कहें। यह शर्त इस मामले की गंभीरता को दिखाती है।
दो जजों की पीठ ने की सुनवाई
इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने की। कोर्ट झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें सजा निलंबित करने की मांग खारिज कर दी गई थी।
निचली अदालत ने सुनाई थी 7 साल की सजा
इससे पहले रांची की सीबीआई विशेष अदालत ने 30 अगस्त 2025 को एनोस एक्का को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए सात साल की सजा सुनाई थी। उन्हें भूमि घोटाले के मामले में दोषी पाया गया था।
सीबीआई जांच में सामने आया था जमीन घोटाला
जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के मुताबिक, एनोस एक्का और उनके सहयोगियों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए आदिवासी जमीन पर कब्जा करने की साजिश रची थी। नियमों को दरकिनार कर जमीन की खरीद-फरोख्त की गई थी।
सीएनटी एक्ट उल्लंघन का मामला
यह पूरा मामला छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम के उल्लंघन से जुड़ा है। इस कानून के तहत आदिवासी जमीन को गैर-आदिवासियों को ट्रांसफर करना प्रतिबंधित है। आरोप है कि इसी नियम को तोड़कर जमीन खरीदी गई थी।
कानूनी लड़ाई अभी बाकी
सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बावजूद एनोस एक्का की कानूनी लड़ाई अभी जारी है। अंतिम फैसला आने तक इस मामले में आगे भी सुनवाई होती रहेगी। कोर्ट के इस फैसले से साफ है कि हर पहलू को ध्यान में रखकर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

