लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान जब देशभर के लाखों छात्रों के भविष्य का मुद्दा उठा, तो विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने युवाओं की नाराजगी और उनके सम्मान की बात की. उन्होंने कहा कि छात्रों का गुस्सा पूरी तरह जायज था, क्योंकि वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं. राहुल ने कहा कि देश का युवा सिर्फ सम्मान चाहता है और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए. छात्रों के प्रदर्शन में नफरत नहीं थी, बल्कि अपने भविष्य को सुरक्षित करने की चिंता थी. उन्होंने कहा कि यही युवा कल देश की दिशा तय करेंगे, इसलिए उनकी समस्याओं पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए और बीजेपी नेताओं को भी इसे समझना चाहिए.
हालांकि, अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने लोगों को तीन श्रेणियों, स्टूडेंट, इडियट और अंधभक्त, में बांटकर टिप्पणी की. उनके इतना कहते ही सत्ता पक्ष के सांसदों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया और सदन में हंगामा मच गया. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 7 बार खड़े होकर राहुल को टोका और संसदीय नियम का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को माफी मांगनी चाहिए. इस पर राहुल ने कहा, “अगर आप चाहते हैं कि देश में सिर्फ बीजेपी बोले तो मैं चुप होकर बैठ जाता हूं.”
स्पीकर ओम बिरला ने भी राहुल को 11 से ज्यादा बार टोका. कहा कि वे इस तरह के असंसदीय शब्द नहीं बोल सकते. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पीकर से कहा, “इन शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटा दिया जाए.”
राहुल गांधी बोले- देश के भविष्य ने हमारी सड़कों पर क्या किया
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, “मैं बहुत उत्साहित था और इस बात से आश्वस्त था कि देश के भविष्य ने हमारी सड़कों पर क्या किया. यह गुस्सा, हिंसा या नफरत नहीं थी. यह देश के युवाओं और आने वाली पीढ़ी की भावनाओं की गहरी अभिव्यक्ति थी. मुझे लगता है कि सभी राजनीतिक दलों को, जिसमें बीजेपी के मेरे साथी भी शामिल हैं, इस भावना का सम्मान करना चाहिए. मुझे पूरा यकीन है कि अगर बीजेपी के मेरे साथी अपने बच्चों से पूछें कि उनके भाई-बहन जो कर रहे थे, उसके बारे में वे क्या सोचते हैं, तो उन्हें अपने बच्चों का भी समर्थन ही मिलेगा. जो हुआ है उसमें कुछ भी गलत नहीं है और हर भारतीय को इस पर गर्व होना चाहिए.”
राहुल गांधी ने आगे कहा कि हालात ऐसे बने कि प्रोटेस्ट के लिए छात्रों को उतरना पड़ा. दुनिया कैसे बदल रही है, यह युवा समझ रहे हैं. प्रदर्शनकारी छात्रों पर पूरे देश को गर्व है. इसी दौरान राहुल गांधी ने अंधभक्त का जिक्र किया, जिसे लेकर सदन में हंगामा शुरू हो गया. उन्होंने सदन में एक लड़की का जिक्र करते हुए कहा कि मैंने उससे पूछा था कि अंधभक्त को आप कहां रखना चाहेंगी. इसी के बाद विवाद शुरू हो गया.
राहुल गांधी ने जैसे ही अंधभक्त शब्द का जिक्र किया, सत्ता पक्ष की ओर से सवाल उठाए गए. किरेन रिजिजू सामने आए और कहा कि यह शब्द असंसदीय है. उन्होंने स्पीकर से इसे सदन की कार्यवाही से हटाने की अपील की. रिजिजू ने कहा कि इस शब्द के इस्तेमाल पर उन्हें आपत्ति है.
उधर राहुल गांधी ने कहा, “मैं जैसे ही बोलता हूं, सदन में हंगामा होने लगता है. जैसे ही मैं बोलता हूं, किरेन रिजिजू खड़े हो जाते हैं. क्या देश में सिर्फ बीजेपी ही बोलेगी?”
हालांकि, विवादित शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटाए जाने के बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी.
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि एग्जाम का पूरा सिस्टम वसूली से भरा है. शिक्षा व्यवस्था पर आरएसएस का कब्जा है. हर बड़े पद पर RSS के लोग बैठे हैं. धर्मेंद्र प्रधान ने कभी शिक्षा मंत्रालय नहीं चलाया. धर्मेंद्र प्रधान RSS का मुखौटा थे. छात्रों ने साहस के साथ RSS का सामना किया. प्रधान नहीं, RSS छात्रों की दुश्मन है.
उन्होंने कहा, “हमारा सिस्टम बहुत खराब और क्रूर है. हर चीज का निजीकरण किया जा रहा है. यह जबरन वसूली का सिस्टम है. यह बहुत बेरहम और खराब सिस्टम है.”
राहुल गांधी ने आगे कहा कि इस सिस्टम की आत्मा पर RSS का कब्जा हो गया है. उन्होंने कहा, “राजनाथ सिंह ने कहा कि हम यूपीए नहीं हैं, हमारे मंत्री कभी इस्तीफा नहीं देते. वे सही कह रहे हैं. धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा दिखावटी है क्योंकि उन्होंने कभी शिक्षा मंत्रालय चलाया ही नहीं. शिक्षा मंत्रालय को चलाने वाला संगठन आरएसएस है. इसे चलाने वाला व्यक्ति मंत्री के ऑफिस में बैठा ओएसडी है. छात्र इसलिए नाराज हैं क्योंकि उन्हें भारत में छात्र बने रहने, अपने जुनून को फॉलो करने, अपनी बात कहने और अपने मन के सवाल पूछने की इजाजत नहीं है. उन्हें आरएसएस की मनगढ़ंत और बेतुकी हिस्ट्री को मानने के लिए मजबूर किया जाता है. धर्मेंद्र प्रधान तो बस एक चेहरा हैं. असली दुश्मन आरएसएस है. वे ही लोग हैं जो चाहते हैं कि आप अंधभक्त बनें.”
किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से की माफी की मांग, सदन में हंगामा
किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से इस आरोप को लेकर माफी की मांग उठाई. उन्होंने कहा, “नेता प्रतिपक्ष ऐसा कैसे कह सकते हैं कि गृह मंत्री ने छात्रों को पीटने के आदेश दिए. किस आधार पर उन्होंने गृह मंत्री को लेकर यह टिप्पणी की? राहुल गांधी अपने बयान का आधार बताएं.”
रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी को इस टिप्पणी के लिए माफी मांगनी चाहिए. उन्होंने गृह मंत्री को लेकर दिया गया बयान गलत बताया. वहीं, स्पीकर ओम बिरला ने भी राहुल गांधी को नसीहत दी कि बिना तथ्यों के किसी पर आरोप नहीं लगाना चाहिए.
संसद के बाहर राहुल बोले- शाह ने फायरिंग का आदेश नहीं दिया तो सदन में आएं
लोकसभा में अपने भाषण के बाद राहुल गांधी ने संसद परिसर में कहा, “गृह मंत्री अमित शाह सदन में नहीं आए, जबकि उन्हें छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर जवाब देना चाहिए था. अगर गृह मंत्री ने कोई आदेश नहीं दिया है, तो उन्हें सदन में आकर साफ कहना चाहिए कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया. सबसे बड़ी बात यह है कि मुझे संसद में बोलने का अधिकार है और वह अधिकार मुझे मिलना चाहिए.”
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