किसलय शानू
रांची : हजारीबाग रेंज के डीआईजी ने बच्चों की गुमशुदगी से जुड़े मामलों को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है. मामले को लेकर डीआईजी द्वारा एक रिपोर्ट तैयार की गई है. रिपोर्ट के अनुसार, लापता बच्चों के मामलों में पुलिस की शिथिलता और लापरवाही पर सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए रेंज के पांच जिलों—हजारीबाग, गिरिडीह, चतरा, कोडरमा और रामगढ़ के एसपी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है.
मानव तस्करी या अपहरण मानकर तुरंत दर्ज करें प्राथमिकी
डीआईजी ने अपने रिपोर्ट में स्पष्ट निर्देश दिया है कि बच्चों की गुमशुदगी के मामलों में थोड़ी सी भी देरी किसी बड़ी अनहोनी या मानव तस्करी का कारण बन सकती है. उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय ‘बचपन बचाओ आंदोलन बनाम भारत संघ’ (W.P. Civil No-75/2012) का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हर लापता बच्चे के मामले को संभावित मानव तस्करी या अपहरण का मामला मानते हुए तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करना अनिवार्य है.
इसके साथ ही भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और अपराध अनुसंधान विभाग (CID), झारखंड द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का भी पूरी तरह पालन करने का सख्त निर्देश दिया गया है.
क्या है डीआईजी द्वारा जारी प्रमुख निर्देश
अभिलेखों की समीक्षा और पेंडिंग केस पर कार्रवाई : सभी जिलों के एसपी को निर्देश दिया गया है कि वे अपने अधीनस्थ थानों के पुराने रिकॉर्ड्स की बारीकी से समीक्षा करें. यदि कोई ऐसा मामला सामने आता है जहां बच्चा अब भी लापता (Untraced) है और प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, तो वहां तुरंत एफआईआर दर्ज कर रिपोर्ट सौंपी जाए. सभी पांचों जिलों के एसपी को लंबित मामलों की पूरी विवरणी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. इस रिपोर्ट में कांड संख्या, धारा, लापता बच्चे का विवरण (नाम, उम्र, पता), मामला कब से लंबित है और अब तक की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा देना होगा.
अंतर-राज्यीय गिरोहों पर सीआईडी से समन्वय : लापता बच्चों की बरामदगी के लिए यदि किसी अन्य राज्य या एजेंसी के सहयोग की आवश्यकता पड़ती है, तो मामले को तुरंत डीआईजी के संज्ञान में लाने को कहा गया है ताकि अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के माध्यम से समन्वय स्थापित किया जा सके.
हर महीने देनी होगी मासिक प्रगति रिपोर्ट
अब से हर महीने दो अलग-अलग प्रारूपों में रिपोर्ट देनी होगी:
प्रपत्र-A : लंबित मामलों की विवरणी.
प्रपत्र-B : उस महीने बरामद किए गए बच्चों का ब्योरा (कहां से और कब बरामद किए गए व वर्तमान कानूनी स्थिति). डीआईजी के सख्त निर्देश के बाद जिलों के एसपी ने उन्हें रिपोर्ट भेज दिया है. जिसके आधार पर लापता बच्चों के मामले में कार्रवाई की मॉनिटरिंग अब खुद हजारीबाग रेंज डीआईजी अंजनी झा के द्वारा की जा रही है.
सीआइडी एडीजी को भेजी गई रिपोर्ट
हजारीबाग रेंज डीआईजी ने तैयार अपनी रिपोर्ट को सीआईजी मनोज कौशिक सहित अन्य सीनियर पुलिस अधिकारियों के पास भी भेज है और पूरे मामले जानकारी दी गई है.डीआईजी के इस रुख से साफ़ है कि अब निचले स्तर के पुलिस अधिकारियों और थाना प्रभारियों को बच्चों की गुमशुदगी के मामलों में ढिलाई बरतना भारी पड़ सकता है.
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