Ranchi : धुर्वा से लापता तीन बच्चों करण, अर्जुन और शिवा नायक के परिवार पहले ही अपनों की तलाश में परेशान हैं। इसी बीच किसी ने उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर ठगी करने की कोशिश की। करण की मां के मोबाइल पर एक फोन आया। दूसरी तरफ मौजूद व्यक्ति ने दावा किया कि बच्चों का पता उसके पास है। उसने कहा कि अगर 1800 रुपए भेज दिए जाएं तो वह बच्चों का टिकट कटवाकर उन्हें घर वापस भेज देगा। बच्चों की चिंता में डूबे परिवार के लिए यह फोन उम्मीद की एक किरण जैसा था। लेकिन कुछ देर बाद उन्हें शक हुआ और उन्होंने इसकी जानकारी पुलिस को दी। जांच में पता चला कि फोन करने वाला कोई मददगार नहीं, बल्कि साइबर ठग था। पुलिस ने जब नंबर का तकनीकी विश्लेषण किया तो उसका लोकेशन हैदराबाद में मिला। राहत की बात यह रही कि परिवार ने उसके खाते में पैसे नहीं भेजे।
बच्चों के गायब होने की खबर का फायदा उठाने की कोशिश
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, बच्चों के लापता होने की खबर सार्वजनिक होने के बाद कुछ असामाजिक तत्व सक्रिय हो गए हैं। ऐसे मामलों में अक्सर ठग परिजनों की भावनाओं का फायदा उठाकर पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं। इस मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि इस तरह के किसी भी फोन कॉल या संदेश पर भरोसा करने से पहले पुलिस को जरूर सूचना दें।
हटिया स्टेशन तक पहुंची जांच
इधर बच्चों की तलाश में जुटी पुलिस को जांच के दौरान यह पता चला है कि तीनों बच्चे 3 जून को हटिया रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज में वे स्टेशन परिसर में घूमते, पानी पीते और बैठकर बातचीत करते दिखाई दिए हैं। फुटेज के अनुसार दोपहर करीब डेढ़ बजे तक तीनों बच्चों की गतिविधियां कैमरों में रिकॉर्ड होती रहीं। लेकिन इसके बाद तकनीकी खराबी के कारण स्टेशन का सीसीटीवी सिस्टम बंद हो गया। सबसे बड़ी बात यह है कि दोपहर 1:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक करीब तीन घंटे तक कैमरे काम नहीं कर रहे थे।
तीन घंटे का ‘ब्लैक स्पॉट’ बना जांच की सबसे बड़ी चुनौती
पुलिस का मानना है कि बच्चों के गायब होने की गुत्थी इन्हीं तीन घंटों में छिपी हो सकती है। जब शाम साढ़े चार बजे कैमरे दोबारा चालू हुए तो बच्चों का कहीं कोई पता नहीं चला। जांच अधिकारियों का कहना है कि यदि कैमरे उस दौरान चालू रहते तो यह साफ हो सकता था कि बच्चे स्टेशन से बाहर गए या फिर किसी ट्रेन में बैठकर कहीं निकल गए। फिलहाल पुलिस उस समय हटिया स्टेशन से गुजरने वाली ट्रेनों की भी जांच कर रही है।
तपस्विनी एक्सप्रेस पर भी नजर
पुलिस इस संभावना से भी इनकार नहीं कर रही कि तीनों बच्चे किसी ट्रेन में सवार होकर झारखंड से बाहर चले गए हों। इसी कड़ी में तपस्विनी एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों के रूट और संभावित स्टेशनों की जानकारी जुटाई जा रही है।
पुरी पहुंची पुलिस टीम, कई राज्यों में तलाश
मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची पुलिस की एक टीम ओडिशा के पुरी पहुंची है। इसके अलावा दूसरे राज्यों में भी बच्चों के संभावित ठिकानों और सुरागों की जांच की जा रही है। रेलवे, जीआरपी और स्थानीय पुलिस के सहयोग से तलाश अभियान जारी है।
हर फोन कॉल पर टिकी हैं परिवार की उम्मीदें
बच्चों के लापता होने के बाद से उनके घरों में बेचैनी का माहौल है। परिवार के लोग हर फोन कॉल और हर नई सूचना को उम्मीद की नजर से देख रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच लगातार जारी है और बच्चों को सुरक्षित ढूंढ़ निकालने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल परिवार को सबसे ज्यादा इंतजार उस खबर का है, जो उनके बच्चों को वापस घर तक पहुंचा सके।
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