झारखंड के धनबाद में अवैध कोयला खनन और कोयला तस्करी से जुड़े बड़े नेटवर्क पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. मंगलवार (28 जुलाई) को ईडी की रांची जोनल ऑफिस की टीम ने धनबाद में एक साथ 31 ठिकानों पर छापेमारी की. इस दौरान करीब 160 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड निवेश को फ्रीज कर दिया गया, जबकि 1.02 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी भी जब्त की गई. इसके अलावा 200 से ज्यादा संदिग्ध संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज और कई अहम डिजिटल सबूत भी ईडी के हाथ लगे हैं.
ईडी की यह कार्रवाई अनिल गोयल, एलबी सिंह, हरेंद्र चौहान और उनके सहयोगियों से जुड़े मामलों में की गई. जिन 31 ठिकानों पर छापेमारी हुई, उनमें इन लोगों के रिश्तेदारों, सहयोगियों और उनसे जुड़ी कंपनियों के दफ्तर और ठिकाने शामिल हैं. जांच के दायरे में गणेश यादव, पप्पू मंडल, रोहित यादव, माधो सिंह समेत कई अन्य लोगों के नाम भी शामिल हैं.
क्या है पूरा मामला?
ईडी ने यह जांच झारखंड पुलिस की कई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी. इन मामलों में आरोप है कि धनबाद और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन किया गया. इसके बाद चोरी के कोयले की तस्करी की गई और कोयला उठाने के नाम पर जबरन लेवी और वसूली का खेल चलता रहा. पुलिस की जांच के बाद कई मामलों में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है. इन्हीं मामलों को आधार बनाकर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की.
ईडी के मुताबिक जांच में सामने आया कि अवैध कारोबार से कमाई गई रकम को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय कई कंपनियों और लोगों के जरिए घुमाया गया. इसका मकसद पैसे के असली स्रोत को छिपाना और उसे वैध कमाई की तरह दिखाना था. जांच एजेंसी का कहना है कि बाद में इसी पैसे से चल और अचल संपत्तियां खरीदी गईं. यानी अवैध कमाई को निवेश और संपत्तियों में बदलकर वैध दिखाने की कोशिश की गई.
छापेमारी में क्या-क्या मिला
छापेमारी के दौरान ईडी को कई अहम सबूत हाथ लगे. एजेंसी ने एलबी सिंह के नाम पर किए गए करीब 160 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड निवेश को फ्रीज कर दिया, जबकि 1.02 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी भी जब्त की गई. इसके अलावा 200 से ज्यादा संदिग्ध अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज और डेटा, कई लैपटॉप, मोबाइल फोन, अन्य डिजिटल डिवाइस, कंपनियों के अकाउंट बुक, वित्तीय रिकॉर्ड और कई अहम दस्तावेज भी बरामद हुए हैं. ईडी का मानना है कि इन दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों से मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क, अवैध लेन-देन और अपराध से अर्जित रकम के इस्तेमाल से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं.
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब इस मामले में ईडी ने कार्रवाई की हो. इससे पहले नवंबर 2025 में भी अनिल गोयल, एलबी सिंह और उनसे जुड़े लोगों व संस्थाओं के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी. उस कार्रवाई में भी कई अहम दस्तावेज और सबूत मिले थे.
ईडी का कहना है कि अब तक मिले सबूतों की जांच की जा रही है. एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अवैध कोयला कारोबार से कमाई गई रकम किन-किन लोगों तक पहुंची, उसका इस्तेमाल कहां-कहां हुआ और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था. जांच के आधार पर आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है.

