Ranchi : रांची के हरमू स्थित डीएवी कपिलदेव विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक पी.एन. झा के आवास पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम किसुन संकल्प लोक की ओर से आयोजित किया गया था। संगोष्ठी में मिथिला की लोक कला, संस्कृति और परंपराओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस अवसर पर प्रो. अयोध्यानाथ झा द्वारा लिखित पुस्तक ‘मिथिलाक लोक चित्रकला शैली’ के मैथिली अनुवाद का विमोचन किया गया। इस पुस्तक का अनुवाद प्रसिद्ध कवयित्री और कथाकार सुस्मिता पाठक ने किया है। वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक मिथिला की लोक चित्रकला को आम पाठकों तक पहुंचाने में मददगार साबित होगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. महेन्द्र ने कहा कि यह पुस्तक मिथिला की संस्कृति और पारंपरिक कला को समझने के लिए बहुत उपयोगी है। दूरदर्शन रांची के पूर्व निदेशक पी.के. झा ने कहा कि मैथिली में अनुवाद होने से यह पुस्तक और भी लोगों तक पहुंचेगी।
साहित्यकार डॉ. कृष्णमोहन झा ने पुस्तक की विषयवस्तु की सराहना की। लेखक अमरनाथ झा और व्यंग्यकार राजकुमार मिश्र ने भी इस प्रयास की प्रशंसा की। कवि बदरीनाथ झा ने पुस्तक की साज-सज्जा को आकर्षक बताया। इस मौके पर केदार कानन की पुस्तक ‘कोसीकन्हाक चिट्ठी’ का भी लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक कोसी नदी और आसपास के क्षेत्र के जीवन, संस्कृति और परंपराओं पर आधारित है। कार्यक्रम के अंत में पी.एन. झा ने सभी अतिथियों और साहित्यकारों का धन्यवाद किया।
Also Read ; बोकारो में मैट्रिक–इंटर परीक्षा की तैयारी को लेकर प्रशासन सख्त, डीडीसी ने दी हिदायत


