रांची: कोयलांचल शांति सेना (KSS) से जुड़े कथित आतंकी फंडिंग, रंगदारी और अवैध हथियार तस्करी मामले में आरोपी रिया सिन्हा को रांची की अदालत से राहत नहीं मिली है. AJC-XVIII के न्यायिक दंडाधिकारी कुलदीप की अदालत ने 1 अक्टूबर 2026 को रिया सिन्हा की जमानत याचिका खारिज कर दी. अदालत ने कहा कि केस डायरी और जांच में रिया सिन्हा की गैंग के साथ सक्रिय संलिप्तता और संगठनात्मक जुड़ाव का प्रथमदृष्टया संकेत मिलता है.
रिया सिन्हा C.I.D. P.S. Case No. 34/2025 में आरोपी हैं. उनके खिलाफ BNS की धारा 111(3), 111(4), 61(2), Arms Act की विभिन्न धाराओं के अलावा UAPA की धाराएं 17, 18, 18(B), 20 और 21 लगाई गई हैं. वह 17 जनवरी 2026 से न्यायिक हिरासत में हैं.
चुट्टू ओवरब्रिज के पास हथियारों के साथ पकड़े गए थे चार आरोपी
अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, 22 अक्टूबर 2025 की रात पुलिस को सूचना मिली थी कि काले रंग की Tata Safari में कुछ लोग अवैध हथियारों के साथ चुट्टू ओवरब्रिज के पास किसी आपराधिक वारदात की तैयारी कर रहे हैं. पुलिस ने करीब 1:55 बजे वाहन को रोककर चार लोगों को गिरफ्तार किया था.
तलाशी में तीन 7.65 एमएम पिस्तौल, 14 जिंदा कारतूस और तीन खाली मैगजीन बरामद होने का दावा किया गया. इसके अलावा आरोपियों के पास से कई मोबाइल फोन भी बरामद किए गए थे.
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में बाबलू खान उर्फ इनामुल हक, रवि आनंद उर्फ सिंघा, मोहम्मद शाहिद उर्फ अफरीदी खान और मोहम्मद सेराज शामिल थे.
जांच में रिया सिन्हा का नाम सामने आने का दावा
अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज अभियोजन पक्ष के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी बाबलू खान ने पूछताछ में दावा किया था कि सुजीत सिन्हा और उसकी पत्नी रिया सिन्हा समेत अन्य लोगों ने कोयलांचल शांति सेना नाम से संगठित गिरोह बनाया था.

पुलिस का आरोप है कि गिरोह कारोबारियों, डॉक्टरों, बिल्डरों और अन्य लोगों के नाम, पते और मोबाइल नंबर जुटाकर रंगदारी वसूली के लिए इस्तेमाल करता था. आरोप है कि रंगदारी नहीं देने पर हथियार दिखाकर धमकी वाले वीडियो भेजे जाते थे और दहशत पैदा करने के लिए फायरिंग भी की जाती थी.
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि रिया सिन्हा Zangi ऐप पर गिरोह की गतिविधियों से जुड़ी योजनाओं में शामिल थीं और हथियारों की सप्लाई से संबंधित गतिविधियों में सहयोग करती थीं.
बचाव पक्ष ने कहा- सिर्फ पति की पत्नी होने के कारण फंसाया
रिया सिन्हा की ओर से अधिवक्ता मुकेश कुमार ने अदालत में दलील दी कि उनके खिलाफ प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है. बचाव पक्ष ने कहा कि रिया न तो घटनास्थल पर मौजूद थीं और न ही उनके कब्जे से कोई हथियार या कारतूस बरामद हुआ.
दलील दी गई कि उन्हें केवल उनके पति सुजीत सिन्हा की पत्नी होने के आधार पर मामले में आरोपी बनाया गया है. बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि पूरा मामला गिरफ्तार सह-आरोपियों के बयान पर आधारित है.
कोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत?
अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि रिया सिन्हा कथित संगठित आतंकी-रंगदारी नेटवर्क की मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल हैं. यह भी बताया गया कि उनकी पहले की जमानत अर्जी 25 फरवरी 2026 को निचली अदालत ने खारिज की थी. इसके बाद हाईकोर्ट ने भी 17 सितंबर 2026 को जमानत देने से इनकार किया था.
अदालत ने माना कि पिछली जमानत अर्जियों की अस्वीकृति के बाद परिस्थितियों में ऐसा कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं हुआ है, जिससे अब उन्हें राहत दी जा सके. कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोप तय हो चुके हैं और ट्रायल फिलहाल अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज करने के चरण में है.
अदालत के मुताबिक, इस स्तर पर रिया सिन्हा को जमानत देने से साक्ष्यों से छेड़छाड़ या महत्वपूर्ण गवाहों को प्रभावित करने का गंभीर जोखिम हो सकता है. इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने रिया सिन्हा की जमानत याचिका खारिज कर दी.

