Pakur (Mitthu Yadav) : पाकुड़ में बेटियों की शिक्षा को लेकर जागरूकता की बातें तो अक्सर सुनने को मिलती हैं, लेकिन हकीकत यह है कि खासकर ग्रामीण इलाकों में आज भी कई बच्चियां स्कूल तक नहीं पहुंच पाती हैं। कई परिवारों में आर्थिक परेशानी, सामाजिक सोच और जानकारी की कमी के कारण बेटियों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है या फिर वे कभी स्कूल का दरवाजा ही नहीं देख पातीं। ऐसे हालात में पाकुड़ की रितु पांडेय कई लड़कियों के लिए उम्मीद और प्रेरणा बनकर सामने आई हैं। फेस संस्था की सचिव रितु पांडेय पिछले कई वर्षों से गांव-गांव जाकर उन बच्चियों को शिक्षा से जोड़ने का काम कर रही हैं, जो कभी स्कूल नहीं गई थीं। उनका कहना है कि अगर बेटियों को सही दिशा और मौका मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं।
गांव की बच्चियों को स्कूल से जोड़ने की पहल
रितु पांडेय बताती हैं कि ग्रामीण इलाकों में कई ऐसी बच्चियां हैं, जो घर के काम या अन्य कारणों से पढ़ाई से दूर रह जाती हैं। इसी को देखते हुए फेस संस्था ने गांवों में सेंटर खोलकर बच्चियों की पहचान करना शुरू किया। उन्होंने बताया कि अभी जिले भर में करीब 80 सेंटर चल रहे हैं, जिन्हें खुद लड़कियां ही संचालित कर रही हैं। इन सेंटरों के माध्यम से गांव-गांव जाकर उन बच्चियों को ढूंढा जाता है, जो कभी स्कूल नहीं गईं या पढ़ाई छोड़ चुकी हैं।
पांच हजार से अधिक बच्चियों को मिल रही शिक्षा
फेस संस्था के इन प्रयासों का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। रितु पांडेय के अनुसार जिले के 63 सेंटरों में करीब पांच हजार बच्चियों को नियमित रूप से पढ़ाई से जोड़ा गया है। इन बच्चियों को बुनियादी शिक्षा के साथ-साथ आगे की पढ़ाई के लिए भी तैयार किया जा रहा है। संस्था का प्रयास है कि हर बच्ची कम से कम बुनियादी शिक्षा जरूर हासिल करे, ताकि आगे की जिंदगी में वह आत्मनिर्भर बन सके।
पढ़ाई के साथ हुनर भी सिखाया जा रहा
फेस संस्था सिर्फ पढ़ाई तक ही सीमित नहीं है। रितु पांडेय बताती हैं कि करीब तीन हजार बच्चियों को कंप्यूटर, मॉडलिंग और अन्य कौशल की भी जानकारी दी जा रही है। इसका मकसद यह है कि लड़कियां पढ़ाई के साथ कोई हुनर भी सीखें और आगे चलकर रोजगार के अवसर खुद बना सकें। उनका कहना है कि आज के समय में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि कौशल भी जरूरी है। अगर लड़कियां किसी काम में दक्ष होंगी तो वे आत्मनिर्भर बन पाएंगी।
ग्रामीण इलाकों में दिख रहा सकारात्मक बदलाव
फेस संस्था के काम का असर अब गांवों में दिखाई देने लगा है। कई परिवार जो पहले बेटियों की पढ़ाई को जरूरी नहीं मानते थे, अब खुद उन्हें सेंटर तक भेज रहे हैं। धीरे-धीरे लोगों की सोच भी बदल रही है और बेटियों की शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। रितु पांडेय कहती हैं कि उनका लक्ष्य है कि जिले की कोई भी बेटी शिक्षा से वंचित न रहे। इसी सोच के साथ फेस संस्था ग्रामीण इलाकों में लगातार काम कर रही है और हजारों बच्चियों को आगे बढ़ने का रास्ता दिखा रही है।
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