जोहार लाइव ब्यूरो
कांग्रेस नेता और AICC मीडिया विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने शुक्रवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. ITBP महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ चल रहे आमना-सामने के बयान को आधार बनाते हुए खेड़ा ने नरेंद्र मोदी सरकार पर ‘कायराना रवैये’ और ‘समर्पण की नीति’ का आरोप लगाया.
पवन खेड़ा ने कहा, “न शहादत को सलाम, न बहादुरी को शाबाशी. ऐसी सरकार के होते हुए भी हमारे जवान डटकर दुश्मन का सामना कर रहे हैं. लेकिन नरेंद्र मोदी ने 2020 में गलवान में 20 जवानों की शहादत के बाद चीन को क्लीन चिट दे दी थी. उसी क्लीन चिट का नतीजा आज लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक चीन के बढ़ते दुस्साहस के रूप में दिख रहा है.”
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अरुणाचल के शेरा-5 पॉइंट तक पेट्रोलिंग हो पा रही है? क्या असाफिला, माजा और तस्किन में चीन 7 किलोमीटर अंदर आकर टेंट गाड़ चुका है? और क्या पूर्वी लद्दाख में 2020 से पहले वाली स्थिति बहाल हुई है?
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए खेड़ा ने कहा, “चीन ने खुलेआम पाकिस्तान की मदद की. अफसरों ने खुद बताया कि चीन सक्रिय रूप से पाकिस्तान के साथ खड़ा था. इस पर भारत की प्रतिक्रिया क्या रही? समर्पण! हमने हर कदम पर समर्पण किया है. दुनिया अब जान चुकी है कि भारत का प्रधानमंत्री कायर है.”
उन्होंने मोदी की चीन यात्राओं पर भी निशाना साधा. “मुख्यमंत्री रहते हुए 4 बार और प्रधानमंत्री बनने के बाद दर्जनों मुलाकातें कीं, लेकिन लद्दाख और अरुणाचल का मुद्दा कभी नहीं उठाया. चीन के पास मोदी का कौन सा राज है, जिसके कारण वे हर बार बिछ जाते हैं?”
आर्थिक मोर्चे पर भी खेड़ा ने हमला बोला. उन्होंने कहा कि ट्रेड डेफिसिट 99 अरब डॉलर से बढ़कर 112 अरब डॉलर हो गया है. सरकार ने चीन की शर्तों पर वीजा बढ़ाए, ट्रैवल रिस्ट्रिक्शन हटाए और प्रेस नोट-3 में बदलाव किया. चीन पर निर्भरता इतनी बढ़ा दी गई कि टनल बोरिंग मशीन, रेयर अर्थ और दवाओं के API तक चीन के रहमो-करम पर निर्भर हो गए.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खेड़ा ने कहा, “शर्म आनी चाहिए ऐसी सरकार को, जिसके पास इतनी बहादुर सेना है, लेकिन खुद इतनी डरपोक और कायर है. इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी कभी ऐसा नहीं सोचते थे. सिर्फ इसलिए कि आप डरते हैं, क्या पूरा देश आपके डर की कीमत चुकाएगा?”
कांग्रेस नेता का यह बयान अरुणाचल सीमा विवाद और चीन नीति को लेकर विपक्ष के आक्रामक रुख को और तेज करने वाला माना जा रहा है.

