MMDR एक्ट को लेकर झारखंड में चल रहे विरोध के बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने झामुमो और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर झारखंड के साथ MMDR एक्ट के जरिए अन्याय हो रहा है तो ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे दूसरे खनिज व कोयला उत्पादक राज्यों में ऐसी स्थिति क्यों नहीं है. दुबे ने कहा कि अगर झारखंड में कोयला उत्पादन बंद कर दिया जाए तो राज्य सरकार के पास अपने वाहनों में पेट्रोल-डीजल भराने तक के पैसे नहीं बचेंगे.
झामुमो के प्रदर्शन के बाद आया बयान
निशिकांत दुबे का यह बयान ऐसे समय आया है, जब 19 सितंबर को झामुमो ने MMDR एक्ट के खिलाफ झारखंड के अलग-अलग जिलों और प्रखंड मुख्यालयों में प्रदर्शन किया था. झामुमो ने केंद्र सरकार के खिलाफ धरना दिया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकार, राजस्व और स्थानीय हितों से जुड़े सवाल उठाए थे.
दुबे ने कहा, “क्या झारखंड ही अकेला कोयला उत्पादक राज्य है? क्या ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बंगाल और कर्नाटक में कोयला नहीं है? तो फिर ये सभी राज्य संपन्न हैं और केवल झारखंड के साथ ही अन्याय हो रहा है?”
उन्होंने दावा किया कि MMDR एक्ट को खनन क्षेत्र में गलत नीतियों के कारण होने वाली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए लाया गया था. उनके मुताबिक प्रधानमंत्री चाहते हैं कि झारखंड का कोयला भी उसी तरह बेचा जाए, जैसे ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल का कोयला बेचा जाता है.
भाजपा सांसद ने झामुमो के आंदोलन पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि पूरा मामला “कमीशनखोरी और हिंसा” से जुड़ा है. दुबे ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने प्रखंड मुख्यालयों पर हंगामा किया और कई जगह उनके पुतले भी जलाए.
कोयला उत्पादन बंद कर दें
हेमंत सोरेन पर निशाना साधते हुए दुबे ने कहा, “मैं वास्तव में हेमंत सोरेन को धन्यवाद देना चाहता हूं. मेरी इच्छा है कि वे यहां कोयला उत्पादन पूरी तरह बंद कर दें.”
उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर झारखंड सरकार की आर्थिक स्थिति पर बड़ा असर पड़ेगा. दुबे ने कहा, “इसके बाद वे रांची स्थित अपने आवास से बाहर भी नहीं निकल पाएंगे. आखिरकार, झारखंड सरकार के पास अपने वाहनों में पेट्रोल और डीजल भरवाने के लिए भी पैसे नहीं बचेंगे.”
झामुमो ने प्रदर्शन में क्या मुद्दा उठाया था?
बीते 19 सितंबर के प्रदर्शन में झामुमो ने MMDR एक्ट को लेकर राज्य के खनिज अधिकार और राजस्व का मुद्दा उठाया था. पार्टी ने खनिज संसाधनों से जुड़े फैसलों में झारखंड के हितों को प्राथमिकता देने, स्थानीय लोगों के अधिकार और रोजगार सुनिश्चित करने समेत कई मांगें रखी थीं.
झामुमो का कहना है कि खनिज संपदा से जुड़े फैसलों का सीधा असर झारखंड की अर्थव्यवस्था और यहां रहने वाले लोगों पर पड़ता है. पार्टी ने इस मुद्दे पर आंदोलन को आगे भी जारी रखने का संकेत दिया है.
निशिकांत दुबे ने कहा कि देश के संसाधनों पर सभी का अधिकार है और झामुमो की ओर से की जा रही छोटी और सस्ती राजनीति नहीं चलेगी.
MMDR एक्ट को लेकर अब झारखंड में राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आ गया है. झामुमो जहां इसे राज्य के खनिज अधिकार और राजस्व का मुद्दा बता रहा है, वहीं भाजपा इसे खनन व्यवस्था में सुधार और अवैध गतिविधियों पर अंकुश से जोड़ रही है.
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