जोहार लाइव ब्यूरो
झारखंड के सरकारी स्कूलों में अब फर्जी हाजिरी का खेल आसान नहीं होगा. राज्य के 32,582 स्कूलों में पुराने फिंगरप्रिंट स्कैनर की जगह नए आधार प्रमाणित बायोमेट्रिक डिवाइस लगाए जाएंगे. स्कूली शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंजूरी दे दी है. यानी अब शिक्षकों और कर्मचारियों की अटेंडेंस को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की तैयारी है.
विभाग ने इस योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक की पांच साल की कार्ययोजना तैयार की है. डिवाइस की खरीद और रखरखाव पर कुल 15.60 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसका मकसद उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था में तकनीकी खामियों को दूर करना और फर्जी हाजिरी की शिकायतों पर रोक लगाना है.
क्यों बदली जा रही नौ साल पुरानी डिवाइस
राज्य के सरकारी स्कूलों में वर्ष 2017 में मंत्र एमएफएस-100 फिंगरप्रिंट डिवाइस लगाए गए थे. इन डिवाइस में तकनीकी खामियों की शिकायतें सामने आ रही थीं. साथ ही, फर्जी फिंगरप्रिंट के जरिए हाजिरी दर्ज किए जाने की शिकायतें भी मिली थीं.
इसी को देखते हुए सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग की सहमति से पुराने डिवाइस बदलने का फैसला लिया गया. स्कूलों की जरूरत का आकलन करने पर कुल 32,582 नए डिवाइस की आवश्यकता सामने आई है. इनकी खरीद सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के माध्यम से की जाएगी.
योजना के तहत एक बायोमेट्रिक डिवाइस की कीमत 2,900 रुपये निर्धारित की गई है. इस पर 18 प्रतिशत जीएसटी अतिरिक्त लगेगा. चालू वित्त वर्ष 2026-27 में योजना के लिए 11.14 करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान है.
प्रत्येक डिवाइस पर एक साल की वारंटी मिलेगी. वारंटी खत्म होने के बाद अगले चार साल तक रखरखाव के लिए प्रति डिवाइस सालाना 290 रुपये खर्च किए जाएंगे. इस तरह डिवाइस की खरीद के साथ उसके रखरखाव की व्यवस्था भी योजना में शामिल की गई है.
क्या खास है नए डिवाइस में
नए बायोमेट्रिक डिवाइस आधार प्रमाणीकरण के लिए एल-1 रजिस्टर्ड होंगे. इनमें ऑप्टिकल सेंसर और यूएसबी कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं होंगी. ये विंडोज और एंड्रॉयड जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ काम कर सकेंगे.
नई व्यवस्था का उद्देश्य फिंगरप्रिंट प्रमाणीकरण को अधिक सुरक्षित बनाना है, ताकि फर्जी फिंगरप्रिंट के इस्तेमाल की आशंका कम हो. इससे शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड दर्ज करने और उसकी निगरानी करने में भी मदद मिलेगी.
सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है. नए डिवाइस के जरिए उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाने और रिकॉर्ड की डिजिटल निगरानी को बेहतर करने की उम्मीद है.
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