रांची। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने भूमि संरक्षण योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि योजनाओं का कागजी खेल नहीं चलेगा, उनका वास्तविक असर खेतों और किसानों तक दिखना चाहिए. मंत्री गुरुवार को जेएमटीटीसी भवन में भूमि संरक्षण निदेशालय की ओर से आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुईं.
कार्यशाला में भूमि संरक्षण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए मंत्री ने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी. उन्होंने तालाब, पर्कोलेशन टैंक (PT), डीप बोरिंग और बिरसा पक्का चेक डैम (BPCD) जैसी योजनाओं के स्थल चयन और पहचान की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया.
उन्होंने पिछले वर्ष की देनदारियों और बकाया भुगतान को अगस्त के अंत तक पूरा करने को कहा. वर्ष 2025-26 में रिपोर्ट की गई देनदारियों से जुड़े कार्य भी निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने का निर्देश दिया. मंत्री ने स्पष्ट किया कि कार्य पूरा नहीं होने पर संबंधित अधिकारी जवाबदेह होंगे.
पांच साल का डाटा वेबसाइट पर होगा सार्वजनिक
मंत्री ने प्रत्येक जिले में पिछले पांच वर्षों के दौरान निष्पादित भूमि संरक्षण योजनाओं का Social Impact Study कराने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि किसी योजना की सफलता केवल निर्माण पूरा होने से तय नहीं होगी, बल्कि यह देखा जाएगा कि उससे किसानों और ग्रामीण समुदाय को वास्तविक लाभ कितना मिला.
उन्होंने कृषक मित्र, VLW समेत स्थानीय स्तर के कर्मियों को लाभुक समितियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने और योजनाओं की जमीनी स्थिति की जानकारी लेने का निर्देश दिया. साथ ही भूमि संरक्षण निदेशालय को पिछले पांच वर्षों में किए गए कार्यों का पूरा और अद्यतन डाटा विभागीय वेबसाइट पर दर्ज करने को कहा, ताकि योजनाओं की जानकारी सार्वजनिक हो और पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके.
भूमि संरक्षण योजनाओं की निगरानी के लिए राज्य स्तरीय डैशबोर्ड विकसित करने का निर्देश दिया गया. प्रत्येक योजना का विवरण जीओ-टैग्ड तस्वीरों के माध्यम से दर्ज किया जाएगा, जिससे योजनाओं की प्रगति की वास्तविक समय में निगरानी और समीक्षा संभव होगी.
SMAM में 100 फीसद लक्ष्य, 15 दिन में BPCD प्रक्रिया पूरी
कृषि यंत्रीकरण पर उप-मिशन (SMAM) की समीक्षा के दौरान मंत्री ने इस वर्ष 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि लक्ष्य पूरा करने में किसी तरह का बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा. पिछले वर्ष प्राप्त पात्र आवेदनों को केवल इसलिए निरस्त नहीं किया जाए कि उन्हें उस वर्ष स्वीकृति नहीं मिल सकी. ऐसे आवेदनों पर चालू वित्तीय वर्ष में नियमानुसार विचार करने का निर्देश दिया गया.
BPCD को लेकर उन्होंने स्पष्ट समय-सीमा तय करते हुए अगले 15 दिनों में स्थल चयन और प्रशासनिक स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी कर प्रस्ताव निदेशालय को उपलब्ध कराने को कहा. सभी जिलों को कृषि उपकरणों की वर्तमान सूची की समीक्षा कर स्थानीय जरूरत के अनुसार नए उपकरण जोड़ने या अनुपयोगी उपकरण हटाने संबंधी सुझाव देने का निर्देश भी दिया गया.
मंत्री ने कहा कि वास्तविक मृदा संरक्षण कार्य सामान्यतः अक्टूबर के बाद शुरू होते हैं और विभाग के पास प्रभावी रूप से चार से पांच महीने का ही कार्यकाल रहता है. ऐसे में उपलब्ध मानव संसाधन का बेहतर इस्तेमाल करते हुए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए.
तालाब जीर्णोद्धार में जनप्रतिनिधियों से समन्वय
तालाब जीर्णोद्धार योजना में पिछले वर्ष की अनुशंसाओं को भी शामिल करने का निर्देश दिया गया. किसी अनुशंसा को लेकर संशय होने पर संबंधित विधायक से समन्वय स्थापित करने को कहा गया. 15 अगस्त के बाद सभी जिलों में जिला परिषद सदस्यों, प्रमुख, मुखिया और अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए कार्यशालाएं आयोजित करने का भी निर्देश दिया गया.

प्रत्येक जिला भूमि संरक्षण अधिकारी (DSCO/SCO) को लाभुक समितियों की कार्यशाला आयोजित करने और निर्मित जल संरचनाओं के आसपास सामूहिक खेती को बढ़ावा देने को कहा गया, ताकि जल संरक्षण के साथ कृषि उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाई जा सके.
कार्यशाला के दौरान तीन लाभुक महिला समूहों के बीच ट्रैक्टर का वितरण किया गया. मंत्री ने कहा कि कृषि यंत्रीकरण के माध्यम से महिला समूहों और किसानों को सशक्त बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है.
कार्यक्रम में विभागीय सचिव अबूबकर सिद्दीक़, भूमि संरक्षण निदेशक विकास कुमार समेत विभाग के वरीय अधिकारी और पदाधिकारी मौजूद रहे.
Also Read: खान व खनिज बिल पर भड़के हेमंत सोरेन, बोले- खनिज हमारा तो फैसला दिल्ली क्यों करेगी?


