रांची. रांची के अतिरिक्त न्यायिक आयुक्त चतुर्थ सह विशेष न्यायाधीश POCSO एक्ट की अदालत ने सात साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी नसर अंसारी उर्फ नेशर अंसारी को मौत की सजा सुनाई है. अदालत ने IPC की धारा 302 और POCSO एक्ट की धारा 6 के तहत उसे डेथ सेंटेंस दिया है. इसके अलावा सबूत मिटाने के अपराध में IPC की धारा 201 के तहत सात साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है. जुर्माना नहीं देने पर छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा.
यह फैसला 12 अगस्त 2026 को सुनाया गया. इससे दो दिन पहले 10 अगस्त को अदालत ने नसर अंसारी को IPC की धारा 376(AB), 302 और 201 तथा POCSO एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी करार दिया था. अदालत ने कहा कि मामले में पेश मेडिकल, फॉरेंसिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य आरोपी को अपराध से जोड़ते हैं.
2020 में हुई थी वारदात
मामला रांची के रातु थाना क्षेत्र के परहेपाट, ओरांवटोली गांव का है. घटना 8 अक्टूबर 2020 की है. अभियोजन के अनुसार सात साल की बच्ची अपने रिश्तेदार नसर अंसारी के घर गई थी. आरोप है कि नसर ने बच्ची को अपने पास रोक लिया. बाद में जब परिजन बच्ची को खोजते हुए उसके घर पहुंचे तो वहां खून के निशान मिले. घर के पास एक खून से सना टांगी भी मिली.
इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने बच्ची की तलाश शुरू की. घर से करीब 30 से 40 मीटर दूर मड़ुआ के खेत में बच्ची का शव एक प्लास्टिक की बोरी में मिला. अभियोजन का आरोप था कि यौन हिंसा के बाद बच्ची की हत्या कर शव को छिपाने के लिए खेत में फेंका गया था.
पुलिस ने 8 अक्टूबर 2020 को रातु थाना कांड संख्या 319/2020 दर्ज किया. मामले में IPC की धारा 302, 201 और 376(AB) तथा POCSO एक्ट की धाराओं 4 और 6 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई. जांच के बाद 31 दिसंबर 2020 को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई और 2 फरवरी 2021 को आरोप तय किए गए.
कमरे में मिले खून के निशान और टांगी बने अहम सबूत
जांच अधिकारी के अनुसार आरोपी के घर के उस कमरे में फर्श और दीवार पर खून के निशान मिले थे, जहां वह रहता था. घर के पास खून से सनी टांगी भी बरामद हुई थी. बच्ची का शव जिस खेत से बरामद हुआ, वह आरोपी के घर से करीब 40 मीटर की दूरी पर था. वहां से खून से सनी प्लास्टिक की बोरी भी बरामद की गई.
पुलिस ने आरोपी के कपड़े भी जब्त किए. जांच के दौरान उसके खून के नमूने सहित कई साक्ष्य फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए. अदालत में जांच अधिकारी ने आरोपी के कथित इकबालिया बयान और उससे जुड़ी बरामदगी को भी साक्ष्य के तौर पर पेश किया.
पोस्टमार्टम में सिर पर गंभीर चोट, यौन हिंसा की संभावना
RIMS में बच्ची का पोस्टमार्टम किया गया था. मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक उसके सिर पर गंभीर चोटें थीं. सिर की हड्डी में फ्रैक्चर और मस्तिष्क में चोट के साथ खून के थक्के पाए गए थे. रिपोर्ट में मौत का कारण सिर की चोट और उससे उत्पन्न जटिलताओं को बताया गया.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा की संभावना को भी खारिज नहीं किया गया था. अदालत ने मेडिकल साक्ष्य पर विचार करते हुए कहा कि रिपोर्ट में हाइमेन टियर का उल्लेख है और मेडिकल साक्ष्य अभियोजन के मामले के अनुरूप हैं.
गवाहों के मुकरने के बावजूद फॉरेंसिक सबूत बने निर्णायक
इस मामले में अभियोजन ने सात गवाह पेश किए. इनमें मेडिकल विशेषज्ञ, जांच अधिकारी और फॉरेंसिक विशेषज्ञ भी शामिल थे. कुछ गवाहों के बयान में विरोधाभास सामने आया. यहां तक कि केस के सूचक ने भी जिरह के दौरान कहा कि उसे फर्दबयान में लिखी बातों की जानकारी नहीं थी.

बचाव पक्ष ने इसी आधार पर अभियोजन की कहानी पर सवाल उठाया. बचाव पक्ष का कहना था कि सभी चार्जशीटेड गवाहों की गवाही नहीं हुई और कुछ गवाह प्रत्यक्षदर्शी नहीं थे. साथ ही जांच अधिकारी से जिरह के दौरान जब्ती सूची और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य से जुड़े कुछ सवाल भी उठाए गए.
लेकिन अदालत ने कहा कि यह मामला मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है और ऐसे मामलों में जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य आरोपी को अपराध से जोड़ने में महत्वपूर्ण होते हैं. अदालत ने माना कि गवाहों के बयान में आई कमियों के बावजूद मेडिकल, फॉरेंसिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला आरोपी के खिलाफ जाती है.
DNA रिपोर्ट ने जोड़ी अहम कड़ी
मामले की फॉरेंसिक जांच में आरोपी के रक्त नमूने और टांगी से लिए गए नमूने के बीच DNA मैच पाया गया. अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक आरोपी नसर अंसारी के रक्त-पॉजिटिव गॉज कटिंग से तैयार DNA प्रोफाइल टांगी से लिए गए संबंधित नमूने से मैच हुआ.
अदालत ने इसी फॉरेंसिक साक्ष्य को मामले की महत्वपूर्ण कड़ी माना. कोर्ट ने कहा कि मेडिकल, फॉरेंसिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य आरोपी की भूमिका को स्थापित करते हैं.
फॉरेंसिक रिपोर्ट में कई नमूनों में एक ही मानव महिला स्रोत का DNA प्रोफाइल पाया गया, जबकि कुछ नमूनों में मिश्रित और आंशिक DNA प्रोफाइल मिले. अदालत ने आरोपी के रक्त नमूने और टांगी से मिले साक्ष्य के बीच मैच को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना.
अदालत ने कहा. मेडिकल और फॉरेंसिक साक्ष्य ने खोली अपराध की कड़ी
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि भले ही सभी अभियोजन गवाहों की गवाही नहीं हुई, लेकिन उपलब्ध फॉरेंसिक, मेडिकल और परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर्याप्त हैं. कोर्ट ने इस मामले में मेडिकल और वैज्ञानिक साक्ष्यों को मौखिक गवाही से अधिक प्रभावी माना.
अदालत के मुताबिक जांच के दौरान आरोपी के घर से खून के निशान, खून से सनी टांगी, शव को छिपाने में इस्तेमाल हुई बोरी और अन्य सामग्री मिली. इसके साथ ही पोस्टमार्टम और DNA जांच की रिपोर्ट भी रिकॉर्ड पर मौजूद थी. इन सभी साक्ष्यों को एक साथ देखने पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना.
12 अगस्त को हुई सजा पर बहस
10 अगस्त को दोषी करार दिए जाने के बाद 12 अगस्त को अदालत में सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई. अभियोजन पक्ष ने सात साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या को बेहद गंभीर अपराध बताते हुए अधिकतम सजा यानी मौत की सजा देने की मांग की.
वहीं बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, उसका परिवार उस पर निर्भर है और जेल में उसके व्यवहार को लेकर कोई शिकायत नहीं है. बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि आरोपी में सुधार की संभावना है और मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में नहीं आता.
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि आरोपी को पहले ही विस्तृत साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराया जा चुका है. अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हॉटवार जेल से आरोपी से व्यक्तिगत बातचीत का भी उल्लेख किया और कहा कि उसमें पश्चाताप या सुधारवादी रवैया दिखाई नहीं दिया.
अदालत ने क्यों सुनाई मौत की सजा
अदालत ने माना कि सात साल की बच्ची के साथ penetrative sexual assault और हत्या की प्रकृति बेहद गंभीर है. कोर्ट ने कहा कि ऐसे अपराध के लिए कानून में मौत की सजा का प्रावधान है और इस मामले में अपराध की प्रकृति मौत की सजा को उचित ठहराती है.
इसके बाद नसर अंसारी को IPC की धारा 302 और POCSO एक्ट की धारा 6 के तहत मौत की सजा सुनाई गई. IPC की धारा 201 के तहत उसे सात साल का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा मिली. जुर्माना नहीं देने पर छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास होगा.
मामले की टाइमलाइन
8 अक्टूबर 2020: घटना और FIR दर्ज.
31 दिसंबर 2020: पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की.
2 फरवरी 2021: अदालत ने आरोप तय किए.
19 अप्रैल 2021: अभियोजन साक्ष्य की शुरुआत.
1 अगस्त 2026: फैसले के लिए मामला सुरक्षित.
10 अगस्त 2026: नसर अंसारी को दोषी करार दिया गया.
12 अगस्त 2026: मौत की सजा सुनाई गई.
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार नसर अंसारी 10 अक्टूबर 2020 से न्यायिक हिरासत में है और सुनवाई के दौरान पांच साल 10 महीने और दो दिन की हिरासत काट चुका है.
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